पटना। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि 2022 तक बिहार को समृद्ध बनाना सरकार का लक्ष्य है। बिहार ज्ञान की धरती रहा है। इस राज्य पर सरस्वती की असीम कृपा है। अगर इसे लक्ष्मी का साथ मिल जाए,तो यह राज्य विकसित राज्यों की श्रेेणी में आ जाएगा। यह काम केंद्र सरकार करेगी। पूर्वी भारत के विकास से बिहार का भी विकास होगा। उक्त बातें वह पटना यूनिवर्सिटी के शताब्दी समारोह के मौके पर कह रहे थे।
पीयू अपनी पहचान फिर से दिखाए : पटना यूनिवर्सिटी (पीयू) को केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा देने की मांग पर प्रधानमंत्री ने कहा कि इस विश्वविद्यालय को इससे भी आगे ले जाना चाहता हूं। मैं इसे वर्ल्ड यूनिवर्सिटी बनाना चाहता हूं। विश्व के टाॅप 500 यूनिवर्सिटी में भारत का नाम नहीं है। ज्ञान की धरती होने के कारण बिहार से बड़ी उम्मीद है। 100 वर्षों में पीयू ने कई महान विभूतियों को पैदा किया है। अब मौका है कि पीयू अपनी पहचान फिर से दिखाए। केंद्र सरकार निजी क्षेत्र से 10 और पब्लिक सेक्टर से 10 विश्वविद्यालय को वर्ल्ड यूनिवर्सिटी बनाएगी। अगले पांच वर्ष में इन्हें 10000 करोड़ की राशि दी जाएगी। सभी सरकारी नियमों से ये विश्वविद्यालय मुक्त होंगे। इन्हें अंतरराष्ट्रीय मानक पर स्वयं खड़ा होना होगा। 20 यूनिवर्सिटी के सेलेक्शन के लिए एक उच्च स्तरीय कमिटी बनेगी। इसमें किसी की सिफारिश नहीं चलेगी। मापदंड का पालन करने वाले यूनिवर्सिटी का ही चयन होगा।
नालंदा व विक्रमशिला की चर्चा : बिहार के गौरवशाली इतिहास की चर्चा करते हुए नरेंद्र मोदी ने कहा कि नालंदा व विक्रमशिला विश्वविद्यालय को कैसे भूला जा सकता है। जितनी पुरानी गंगा की धारा है, उतनी ही पुरानी यहां ज्ञान की धारा है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की तारीफ करते हुए कहा कि वह बिहार के विकास के लिए प्रतिबद्ध हैं।
स्टार्टअप में चौथे नंबर पर भारत : प्रधानमंत्री ने पीयू के छात्रों से कहा कि वे इनोवेशन पर जोर दें। इसके बिना कोई राष्ट्र आगे नहीं बढ़ सकता है। छोटे-छोटे प्रोजेक्ट पर फोकस करें। बाद में यही स्टार्टअप बन जाएगा। भारत स्टार्टअप में चौथे नंबर पर है। जीवन को नई ऊंचाई पर ले जाना समय की मांग है। देश को आगे बढ़ाना युवाओं का काम है। आज आईटी क्रांति ने भारत का नजरिया ही बदल दिया है।
मुख्यमंत्री : मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि बिहार बुद्ध, महावीर, चाणक्य व आर्यभट्ट की धरती है। पटना यूनिवर्सिटी के शताब्दी समारोह में प्रधानमंत्री का आना बिहार के लिए गौरव की बात है। उन्होंने प्रधानमंत्री से निवेदन किया कि पटना यूनिवर्सिटी को केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा मिले। इसके लिए बिहार उनका आभारी रहेगा। सीएम ने कहा कि 1917 में इंडियन लेजिस्लेटिव एसेंबली से इस यूनिवर्सिटी की स्थापना हुई थी। उसी साल बापू भी चंपारण आए थे। एक समय था जब इस यूनिवर्सिटी में पढ़ना गौरव की बात थी। इसे आॅक्सफोर्ड आॅफ इस्ट कहा जाता था। मैं खुद साइंस काॅलेज व बिहार इंजीनियरिंग काॅलेज का छात्र रहा हूं। आईएएस, आईपीएस, आईएफएस, न्यायायिक सेवा समेत कई क्षेत्रों में यहां के छात्र हैं। जय प्रकाश नारायण व रामधारी सिंह दिनकर पीयू के ही प्रोडक्ट थे।
डिप्टी सीएम : उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा कि पटना यूनिवर्सिटी का गौरव फिर से लौटेगा। इस यूनिवर्सिटी के छात्र हर क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। 1974 आंदोलन की नींव रखने वाले जेपी यहीं के छात्र थे। अंग्रेजों ने गंगा के तट पर पटना यूनिवर्सिटी की स्थापना की थी। उस समय इसका क्षेत्राधिकार वर्तमान झारखंड, उड़ीसा व नेपाल तक था। एक समय था जब पटना यूनिवर्सिटी में नामांकन से समाज में प्रतिष्ठा बढ़ जाती थी। मैंने भी इसी यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की है।
मौके पर राज्यपाल सत्यपाल मलिक, पटना यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो रास बिहारी सिंह, केंद्रीय मंत्री रविशंकर , राम विलास पासवान, अश्विनी चौबे व उपेंद्र कुशवाहा, बिहार के शिक्षा मंत्री कृष्ण नंदन वर्मा समेत सांसद, विधायक, प्रोफेसर एवं छात्र उपस्थित थे।