पटना। सूबे के किसानों के जैविक उत्पादों के प्रमाणीकरण के लिए सरकार प्रयास कर रही है। इसी कड़ी में बुधवार को किसानों के गठित समूहों के जैविक प्रमाणीकरण के लिए सिक्किम स्टेट आर्गेनिक सर्टिफिकेशन एजेंसी (एसएसओसीए) एवं बिहार स्टेट सीड एंड आर्गेनिक सर्टिफिकेशन एजेंसी (बीएसएसओसीए) के बीच करार हुआ। कृषि मंत्री डाॅ प्रेम कुमार की उपस्थिति में एकरारनामा पर एसएसओसीए के सीईओ डाॅ यशोदा प्रधान एवं बीएसएसओसीए के निदेशक बेंकटेश नारायण सिंह ने हस्ताक्षर किया।
जैविक उत्पादों का प्रमाणपत्र मिलने से जैविक खेती करने वाले किसानों को उनके उत्पादन का अधिक मूल्य मिल सकेगा। प्रमाणपत्र के माध्यम से जैविक उत्पादों का निर्यात भी हो सकेगा। राज्य में कई तरह की सब्जियां, फल, अनाज तथा मसालों की अच्छी खेती होती है। इनके जैविक प्रमाणीकरण से सूबे की कृषि में एक नया अध्याय जुड़ेगा।
मौके पर कृषि उत्पादन आयुक्त सुनिल कुमार सिंह, प्रधान सचिव सुधीर कुमार, कृषि निदेशक हिमांशु कुमार राय, निदेशक उद्यान अरविंदर सिंह समेत मुख्यालय के अधिकारी एवं कर्मी उपस्थित थे। कार्यक्रम कृषि विभाग के मुख्यालय में सम्पन्न हुआ।
पटना से नालंदा व भागलपुर जैविक कोरीडोर के रूप में चिन्हित : पटना से नालंदा तक एनएच के दोनों किनारों एवं पटना से भागलपुर तक गंगा नदी के दोनों किनारों को जैविक कोरीडोर के रूप में चिन्हित किया गया है। इस जैविक कोरीडोर में पड़ने वाले जिलों के किसानो को जैविक खेती करने के लिए चिन्हित किया गया है। किसानों द्वारा ग्रुप निर्माण कर जैविक खेती करने के लिए आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध करायी जा रही हैं।