पटना। सूबे में उत्पादित फल एवं सब्जियों की गुणवत्ता को सुरक्षित रखने एवं उनकी बिक्री के लिए सरकार एसी रिटेल विक्रय केन्द्र स्थापित करेगी। साथ ही फलों एवं सब्जियों के सुरक्षित परिवहन के लिए एसी वाहन (रीफर वैन) की सुविधा भी उपलब्ध कराएगी। बिहार में मुख्यतः आम, अमरूद, लीची, केला, पपीता एवं अनानास फलों की खेती होती है। साथ ही हरी सब्जियों की भी बड़े पैमाने पर खेती होती है। योजना के तहत उद्यमियों को प्राथमिकता का प्रावधान है, लेकिन कृषक भी इन योजनाओं का लाभ ले सकते हैं।
कृषि मंत्री डाॅ प्रेम कुमार ने बताया कि राज्य में 2,53,435 हेक्टेयर में फलों की खेती होती है, जिससे 37,44,012 मीट्रिक टन फलों का उत्पादन होता है। इसी प्रकार हरी सब्जियों की खेती 8,26,853 हेक्टेयर में होती है एवं 21,23,795 मीट्रिक टन सब्जी उत्पादित होती है। फल एवं सब्जी पर वातावरण एवं तापक्रम का बहुत अधिक असर पड़ता है। सुरक्षित एवं नियंत्रित तापक्रम पर परिवहन नहीं होने से ताजेपन एवं गुणवत्ता में कमी आती है। ऐसे उत्पाद के बाजार मूल्य कम मिलते हैं एवं उत्पादकों को नुकसान होता है।
उन्होंने बताया कि किसानों की इस समस्या को दूर करने के लिए राष्ट्रीय बागवानी मिशन एवं मुख्यमंत्री बागवानी मिशन के तहत परिवहन के लिए रीफर वैन एवं बिक्री स्थल पर एसी आउटलेट संस्थापन की योजना सम्मिलित है। परिवहन के दौरान फल एवं सब्जियां खराब न हो। इसके लिए प्लास्टिक क्रेट की भी योजना सम्मिलित है।
अनुदान का प्रावधान : योजना के तहत रीफर वैन की इकाई लागत 26 लाख रुपये प्रति इकाई एवं सहायतानुदान 13 लाख रुपये प्रति इकाई है। इसी प्रकार एसी रिटेल आउटलेट संस्थापन की इकाई लागत 15 लाख रुपये प्रति इकाई तथा सहायतानुदान 7.50 लाख रुपये प्रति इकाई है। इसी तरह 400 रुपये प्रति इकाई लागत के प्लास्टिक क्रेट्स पर 360 रुपये प्रति इकाई अनुदान दिया जाता है।
लक्ष्य : वित्तीय वर्ष 2017-18 में रीफर वैन का भौतिक लक्ष्य 10 इकाई एवं वित्तीय लक्ष्य 130 लाख रुपये है। इसी तरह एसी रिटेल आउटलेट का भौतिक लक्ष्य 13 इकाई एवं वित्तीय लक्ष्य 97.50 लाख रुपये है। प्लास्टिक क्रेट्स का भौतिक लक्ष्य 1,20,000 इकाई एवं वित्तीय लक्ष्य 432 लाख रुपये है।