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ऋण देने में कोताही करने वाले बैंकों से सरकारी लेन-देन रुकेगा

पटना। ऋण देने में कोताही बरतने वाले बैंकों से सरकार लेन-देन नहीं करेगी। नए सिर से बैंकों की ग्रेडिंग होगी । सूबे में इस साल 1.10 लाख करोड़ का ऋण लक्ष्य है। इसके विरुद्ध बैंकों ने पहली छमाही में 46,816 करोड़ ऋण बांटा, जो लक्ष्य का 43 फीसदी है। उक्त जानकारी उपमुख्यमंत्री सह वित्तमंत्री सुशील कुमार मोदी ने दी। वह राज्यस्तरीय बैंकर्स समिति (एसएलबीसी) की समीक्षा बैठक के बाद प्रेस प्रतिनिधियों को संबोधित कर रहे थे। 
 उप मुख्यमंत्री ने बताया कि डिजिटल लेन देन को बढ़ावा देने का बैंकों को निर्देश दिया गया है। बिहार में डिजिटल लेन देन का लक्ष्य इस साल 148 करोड़ जबकि देश में 2500 करोड़ है। बैंकों को भ्रष्टाचार पर रोक के लिए सिस्टम तैयार करने के लिए भी कहा गया है। सरकारी विभागों के बैंक खातों की संख्या समीक्षा के बाद कम की जाएगी। 
उन्होंने कहा कि रबी मौसम में इस साल 15 लाख नए किसानों को क्रेडिट कार्ड दिया जाएगा। साथ ही क्रेडिट कार्ड धारक 61 लाख किसानों को एटीएम देने का भी निर्देश है। बिहार में स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) का कार्य संतोषजनक है। छह लाख 90 हजार समूह बने हैं, जिनमें पांच लाख का खाता खुल चुका है। बैंकों ने समूह को 3700 करोड़ का ऋण दिया है। इनकी वसूली दर 98 फीसदी है। 
हर दस बैंक पर एक आधार केंद्र खोलने का निर्देश है। 31 दिसंबर तक 542 आधार केंद्र बैंक की शाखाओं में खोले जाएंगे। जनधन योजना के तहत बिहार में 3 करोड़ 97 लाख खाता खोले गए हैं। इनमें 236 करोड़ रुपये जमा हुए हैं। प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना, जीवन ज्योति व पेंशन योजना से 67 लाख लोग जुड़े हैं। 6521 छात्रों को स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड व 33295 छात्रों को शिक्षा ऋण दिया गया है। 

बैंकर्स कमेटी की बैठक में ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार, मुख्य सचिव अंजनी कुमार सिंह, विकास आयुक्त शिशिर सिन्हा, वित्त विभाग की प्रधान सचिव सुजाता चतुर्वेदी नाबार्ड व आरबीआई के प्रतिनिधि एवं विभिन्न बैंकों के वरीय अधिकारी मौजूद थे।


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