पटना। तीसरे कृषि रोड मैप (2017-22) का शुभारंभ राष्ट्रपति राम नाथ कोविन्द 9 नवंबर को करेंगे। समारोह बापू सभागार (सम्राट अशोक कन्वेंशन केंद्र) में होगा। हर भारतीय की थाल में बिहार का एक व्यंजन पहुंचाना इस रोड मैप का प्रमुख उद्देश्य है। उक्त जानकारी कृषि मंत्री डाॅ प्रेम कुमार ने प्रेस प्रतिनिधियों को दी।
उन्होंने बताया कि जैविक खेती, खाद्य एवं पोषण सुरक्षा, समावेशी विकास व किसानों की आमदनी में वृद्धि के कार्यक्रमों को लागू करने में सदाबहार तकनीक पर जोर दिया जायेगा। इससे वर्तमान की आवश्यकता की पूर्ति के साथ-साथ भविष्य के अवसर भी बने रहेंगे। इंद्रधनुषी क्रांति के लिए यह एक प्रयास है, जो समावेशी विकास के एक माॅडल का मार्ग प्रशस्त करेगा। तीसरे कृषि रोड मैप की पृष्ठभूमि में दोनों कृषि रोड मैप को लागू करने के अनुभव तथा नई परिस्थितियों को ध्यान में रखा गया है।
कृषि मंत्री ने कहा कि तीसरे कृषि रोड मैप में 12 विभागों को शामिल किया है। बिहार में कृषि के विकास के लिए प्राकृतिक संसाधन उपलब्ध हैं। फिर भी राज्य में फसल सहित बागवानी, दुग्ध उत्पादन, मांस एवं मछली उत्पादन की प्रति इकाई उत्पादकता संभावना की तुलना में कम है। इसी पृष्ठभूमि में 2006 से कृषि उत्पादन एवं उत्पादकता में वृद्धि के लिए कई कदम उठाये गये हैं। पहले कृषि रोड मैप की अवधि 2007-12 तक थी। दूसरे कृषि रोड मैप में 2012-17 तक के लिए कार्यक्रम बनाये गये थे। पहले एवं दूसरे कृषि रोड मैप के कार्यान्वयन के फलस्वरूप उल्लेखनीय सफलता मिली है। केंद्र सरकार ने बिहार को 2012 में चावल, 2013 में गेहूं तथा 2016 में मक्का के उत्पादन में उत्कृष्ट उपलब्धि के लिए कृषि कर्मण पुरस्कार दिया है।
मौके पर कृषि उत्पादन आयुक्त सुनिल कुमार सिंह, प्रधान सचिव सुधीर कुमार, कृषि निदेशक हिमांशु कुमार राय, निदेशक उद्यान अरविन्दर सिंह, कृषि विभाग के पदाधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद थे।