पटना। जीएसटी नोटबंदी की अगली कड़ी है। नोटबंदी और जीएसटी एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। दोनों का एक ही मकसद है साफ-सुथरी अर्थव्यवस्था, जिसमें नगद का प्रवाह कम हो। इसका परिणाम भी दिख रहा है। आज कैश ट्रांजेक्शन 12 से घटकर जीडीपी का नौ फीसदी रह गया है। उक्त जानकारी उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने दी। वह बिहार चैंबर आॅफ काॅमर्स की ओर से जीएसटी पर आयोजित परिचर्चा में शिरकत कर रहे थे।
उप मुख्यमंत्री ने बताया कि नोटबंदी की घोषणा 8 नवंबर 2016 को हुई थी। बिहार में सितंबर 2016 से मार्च 2017 तक बैंकों में 42000 करोड़़ रुपये जमा हुए। नोटबंदी के बाद करीब 250000 करोड़ की अधिक राशि बैंकों में जमा हुई। आयकर विभाग इसकी जांच कर रहा है। नतीजा आय कर संग्रह में इजाफा हो रहा है। उन्होंने कहा कि जीएसटी को नए उद्यमी पसंद कर रहे हैं। वे नई सोच के साथ आ रहे हैं। जीएसटी को लोगों ने सराहा है। प्रक्रिया थोड़ी जटिल है। वजह आॅनलाइन व्यवस्था है। इसे भी धीरे-धीरे सरल किया जा रहा है। 10 नवंबर को गुवाहाटी में जीएसटी काउंसिल की बैठक महत्वपूर्ण होगी। उपभोक्ता व कारोबारियों के हित में कई निर्णय लिए जाएंगे। जीएसटी के 28 फीसदी टैक्स स्लैब में करीब 227 आइटम हैं। इनमें 80 फीसदी आइटम पर टैक्स 18 फीसदी होने की संभावना है।
मौके पर वाणिज्य कर विभाग की प्रधान सचिव सुजाता चतुर्वेदी, अपर आयुक्त डाॅ प्रतिमा समेत सेंट्रल एवं स्टेट जीएसटी के अधिकारी, चैंबर आॅफ काॅमर्स के अध्यक्ष पीके अग्रवाल, सभी पदधारक एवं कारोबारी मौजूद थे।