पटना। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि बिहार के किसान जुझारू हैं। हर विपरीत परिस्थितियों में वे अडिग रहते हैं। यहां की धरती अन्नपूर्णा है। बेहतर उत्पादन के लिए बिहार सम्मानित भी हो चुका है। कृषि रोड मैप किसानों की उन्नति में सहायक होगा। साथ ही बिहार की अर्थव्यवस्था भी मजबूत होगी। उक्त बातें वह 1.54 लाख करोड़ रुपये के तीसरे कृषि रोड मैप (2017-22) के शुभारंभ के मौके पर कह रहे थे। समारोह का आयोजन बापू सभागार (सम्राट अशोक कन्वेंशन केंद्र) में हुआ था।
अगली हरित क्रांति का मिलेगा श्रेय : राष्ट्रपति ने कहा कि कृषि के विकास के लिए जल प्रबंधन पर काम करने की जरूरत है। आहर-पईन जैसे परंपरागत जल प्रबंधन प्रणाली से भी लाभ होगा। यह बेहतर तरीके से लागू हो जाए, तो अगली हरित क्रांति का श्रेय बिहार को मिलेगा। जैविक खेती के लिए सभी अनुकूल परिस्थितियां यहां मौजूद हैं। जमीन संबंधित समस्याओं के निराकरण से भी अच्छा फल मिलेगा। बिहार 2017 को चंपारण सत्याग्रह शताब्दी वर्ष के रूप में मना रहा है। चंपारण सत्याग्रह किसानों से संबंधित था। शताब्दी वर्ष में कृषि रोड मैप का लोकार्पण अच्छा प्रयास है।
सुधा डेयरी की प्रशंसा : डेयरी क्षेत्र में सुधा के कार्यों की प्रशंसा करते हुए राष्ट्रपति ने बताया कि इसके उत्पाद आज कई राज्यों में मिल रहे हैं । डेयरी प्रबंधन ने छठ का महत्वपूर्ण प्रसाद ठेकुआ मुझे दिल्ली भेजा। किसानों के फायदे के लिए हाल ही में दिल्ली में वर्ल्ड फूड फेस्टिवल का आयोजन हुआ। बिहार के लोगों ने भी उसमें शिरकत की। उन्होंने उम्मीद जतायी कि कृषि रोड मैप से बिहार की छवि बदलेगी और देश के विकास में इसका महत्वपूर्ण योगदान होगा।
कर्म से बिहारी हूं : राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि जन्म से नहीं, लेकिन कर्म से बिहारी हूं। बिहार के राज्यपाल रहने के दौरान यहां के लोगों का मुझे हर क्षेत्र में सहयोग मिला। इस दौरान मुझे बिहार की सभ्यता-संस्कृति, बु़द्ध व महावीर के संदेशों को समझने का मौका मिला। आधुनिक भारत के निर्माण में बिहार की महान विभूतियों राजेंद्र प्रसाद, जेपी नारायण, बिस्मिल्लाह खां, वीर कुंवर सिंह, जगजीवन राम, स्वामी सत्यानंद सरस्वती का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति भवन में राजेंद्र बाबू की प्रतिमा को रोज नमन करता हूं। बापू मेरे आदर्श हैं। राष्ट्रपति भवन पहुंचकर अगर बापू के आदर्शों पर नहीं चल सके,तो जीवन अधूरा है।
राज्यपाल : सूबे के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने कहा कि बिहार सभी प्राकृतिक संसाधनों से परिपूर्ण राज्य है। फनीश्वर नाथ रेणु के मैला आंचल उपन्यास की चर्चा करते हुए कहा कि इसमें उल्लेख है कि कोसी यदि बर्बादी लाती है, तो बाद में हरियाली छोड़ जाती है। उन्होंने उम्मीद जतायी कि अगली हरित क्रांति बिहार में होगी। पांच साल के लिए कृषि रोड मैप बनाना सराहनीय है। यह किसानों की आमदनी बढ़ाने में सहायक होगा।
मौके पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी, कृषि मंत्री डाॅ प्रेम कुमार, ऊर्जा मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव समेत सभी विभागों के मंत्री, सांसद, विधायक, विधान पार्षद, मुख्य सचिव एवं वरीय अधिकारी मौजूद थे।