पटना। जीएसटी काउंसिल ने 28 फीसदी टैक्स स्लैब वाले लगभग 175 सामान पर टैक्स में कमी कर दी है। अब इन्हें 18 फीसदी स्लैब में रखा गया है। टैक्स में इस भारी कटौती का लाभ उपभोक्ताओं को मिलना चाहिए। कंपनियों और वितरकों से अपेक्षा है कि वे सामान की कीमत कम करेंगे और जनता को इसका लाभ पहुंचाएंगे। ऐसा नहीं करने पर मुनाफाखोरी करने वाले कंपनियों व डीलरों पर कार्रवाई होगी। उक्त जानकारी उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने प्रेस काॅन्फ्रेंस में दी।
मुनाफाखोरी रोधी प्राधिकार का गठन : उप मुख्यमंत्री ने बताया कि अगर कोई व्यापारी व उत्पादक मुनाफाखोरी करता है, तो इसके लिए मुनाफाखोरी रोधी प्राधिकार का गठन किया गया है। राज्य सरकार ने एक स्टेट स्क्रीनिंग कमिटी बनायी है, जिसके पास कोई भी व्यक्ति शिकायत दर्ज करा सकता है। सरकार अपने स्तर से भी यह छानबीन करेगी कि करों की दरों में कमी का लाभ जनता को मिल रहा है या नहीं। स्क्रीनिंग कमिटी जांच के बाद राष्ट्रीय स्तर पर गठित प्राधिकार को सूचित करेगी। इस आधार पर मुनाफाखोरी करने वाली कंपनियों व डीलरों पर कार्रवाई होगी। मुनाफाखोरी के खिलाफ कोई उपभोक्ता प्रमाण के साथ screeningcommitteebihar@gmail.com पर अपनी शिकायत कर सकते हैं।
कंपोजिट में शामिल रेस्तरां नहीं लेंगे टैक्स : जीएसटी काउंसिल ने रेस्तरां पर टैक्स 18 एवं 12 से कम कर 5 फीसदी कर दिया है। एक करोड़ तक टर्न ओवर वाले रेस्तरां यदि कंपोजिट में शामिल हैं, तो वे उपभोक्ता से कोई टैक्स नहीं लेंगे एवं अपने टर्न ओवर पर 5 फीसदी कर अपने मुनाफे से भुगतान करेंगे।
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि 28 फीसदी स्लैब वाले अधिकतर सामान पर प्री जीएसटी 31 फीसदी टैक्स (एक्साइज डयूटी 12.50, वैट 14.50 एवं कैस्केडिंग 2 फीसदी ) था। इस कारण इन्हें जीएसटी में 28 फीसदी स्लैब में रखा गया था। पिछले 3 माह से जीएसटी काउंसिल में इस पर विचार चल रहा था। फिटमेंट समिति की अनुशंसा पर 175 वस्तुओं को 18 फीसदी स्लैब में शामिल किया गया है। अब लग्जरी और कुछ आइटम को छोड़ कर अधिकतर चीजें 18 फीसदी की श्रेणी में आ गयी हैं। जीएसटी काउंसिल रिटर्न, एचएसएन कोड एवं इनवाॅयस मैचिंग प्रक्रिया को भी सरल करने में लगी है। बिहार का 2017-18 का राजस्व लक्ष्य 16402 करोड़ है। 2021-22 में यह 27703 करोड़ रुपये होगा। यह राशि पेट्रोल-डीजल को छोड़कर है।