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जर्दालु आम,कतरनी धान व मगही पान को मिली अंतरराष्ट्रीय पहचान 

पटना। बिहार के जर्दालु आम, कतरनी धान एवं मगही पान को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली हैं। भारत सरकार की भौगोलिक दर्शन पत्रिका में भागलपुरी कतरनी धान ( जीआई आवेदन संख्या 553), भागलपुरी जर्दालु (जीआई आवेदन संख्या 551) एवं मगही पान (जीआई आवेदन संख्या 554) को राज्य के बौद्धिक संपदा अधिकार अंतर्गत प्रकाशित किया गया है।

कृषि मंत्री डाॅ प्रेम कुमार ने कहा कि यह राज्य के लिए गौरव की बात है। इसके लिए राज्य के किसान एवं बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर, भागलपुर के कुलपति एवं वैज्ञानिक बधाई के पात्र है, जिनके अथक प्रयास से राज्य को यह  गौरव प्राप्त हुआ है। आने वाले समय में बिहार के अन्य विशिष्ट उत्पाद जैसे शाही लीची एवं मखाना को भी भौगोलिक दर्शन में सम्मिलित कराने का प्रयास किया जाएगा।  

जर्दालु आम : भौगोलिक दर्शन पत्रिका 101, 28.11.2017 में भागलपुर के जर्दालु आम उत्पादक संघ, मधुबन, ग्राम-महेशी, प्रखंड-सुल्तानगंज, जिला-भागलपुर को बागवानी उत्पादन (फल) के अधीन स्वीकृत्ति प्रदान करते हुए भौगोलिक दर्शन का अधिकार दिया गया है। पत्रिका ने जर्दालु आम को भागलपुर का अद्वितीय उत्पाद माना है। ऐसा माना जाता है कि जर्दालु आम को अली खान बहादुर ने इस क्षेत्र में पहली बार लगाया था। जर्दालु आम की विशेषता है कि इसका फल हल्के पीले रंग का होता है। यह अपने विशेष सुगंध के कारण प्रसिद्ध है। 
कतरनी धान : पत्रिका ने भागलपुर कतरनी धान उत्पादक संघ ग्राम-जगदीशपुर, भागलपुर के वर्ग-30 के अंतर्गत कतरनी धान को भौगोलिक दर्शन के लिए पंजीकृत किया है। कतरनी धान अपने पतले, लंबे तथा सुगंध के लिए मशहूर है। 
मगही पान : मगही पान उत्पादक कल्याण समिति, गांव-देवड़ी, पोस्ट-बरहौना, जिला-नवादा के आवेदन को स्वीकृत करते हुए पत्रिका ने बागवानी फसल (पान) वर्ग-31 के अंतर्गत भौगोलिक दर्शन (पंजीकरण एवं संरक्षण) अधिनियम के अंतर्गत मान्यता दी है। नवादा जिले में परंपरागत रूप से मगही पान का उत्पादन किया जाता है। नवादा के अलावा औरंगाबाद और गया के भी किसान मगही पान की खेती करते हैं। मगही पान अपने कोमलता एवं स्वाद के लिए प्रसिद्ध है। 


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