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वास्तविक विकास के लिए कृषि क्षेत्र पर ध्यान देने की जरूरत 

पटना। पूर्व विदेश सचिव प्रो. मुचकुंद दुबे ने कहा कि वास्तविक विकास के लिए कृषि क्षेत्र पर ध्यान देने की जरूरत है। इसका शीघ्र असर अर्थव्यवस्था पर दिखेगा। चीन ने अपने आर्थिक सुधार की शुरुआत 1976 में कृषि क्षेत्र में विकास से की। यह क्षेत्र रोजगार देने में भी सहायक है। कृषि प्रधान अर्थव्यवस्था होने के कारण यह क्षेत्र बिहार जैसे राज्य के लिए भी काफी उपयोगी है। वह बिहार उद्योग संघ (बीआईए) परिसर में आयोजित देश रत्न डाॅ राजेंद्र प्रसाद मेमोरियल लेक्चर को संबोधित कर रहे थे। व्याख्यान का विषय टुवर्ड्स ए न्यू इंडस्ट्रियल पाॅलिसी इन इंडिया था। व्याख्यान से पहले अतिथियों ने देश रत्न डाॅ राजेंद्र प्रसाद को याद किया।  
प्रो दुबे ने कहा कि उद्योग के लिए जमीन की जरूरत है, लेकिन जमीन का संकट है। जमीन अधिग्रहण के लिए आज उद्योग और किसान में टकराव है। किसानों के लिए जमीन ही सब कुछ है। पब्लिक सेक्टर के पास काफी जमीन है, लेकिन उसका कोई उपयोग नहीं हो रहा है। इस दिशा में सरकार की ओर से सार्थक पहल करने की जरूरत है। उन्होंने घरेलू मांग पर ज्यादा फोकस करने पर जोर दिया। दाल, सब्जी व फल जैसे फूड प्रोडक्ट्स एवं स्वास्थ्य पर ध्यान देना चाहिए। विकास में शिक्षा का भी महत्वूपर्ण योगदान है। इसक बिना कुछ भी संभव नहीं है। यूएसए की औद्योगिक नीति में शिक्षा पर काफी जोर है।
 प्रो दुबे ने एसएमइ को बढ़ावा देने की बात कही। साथ ही इस उपक्रम के विकास के लिए वित्तीय संस्थानों की उपयोगिता पर भी बल दिया। किसानों के विकास के बिना सब कुछ अधूरा है। किसानों को उनके उत्पाद की सही कीमत मिले। इसके लिए मार्केटिंग की सही व्यवस्था हो। बाजार कीमत और किसानों को मिलने वाले मूल्य में बहुत अंतर नहीं होना चाहिए। 
प्रो एनके चैधरी ने अपने संबोधन में कहा कि औद्योगिक नीति बनाने से पहले उस राज्य की अर्थव्यवस्था को समझना होगा। राज्य के सहयोग के बिना विकास संभव नहीं है।  
  मौके पर बीआईए के अध्यक्ष केपीएस केशरी, पूर्व अध्यक्ष एसपी सिन्हा, उपाध्यक्ष आरसी गुप्ता समेत शिक्षाविद एवं छात्र मौजूद थे।  
 


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