पटना। किसानों को चालू वर्ष (2017-18) में ग्रामीण बैंकों (बिहार, मध्य बिहार व उत्तर बिहार ग्रामीण बैंक) के जरिए 22,920 करोड़ रुपये का ऋण वितरित किया जायेगा। साथ ही सभी जिलों में शौचालय निर्माण के लिए स्वयं सहायता समूहों को प्रति इकाई 12 हजार रुपये और नियोजित शिक्षकों को वेतन के आधार पर डेढ़ से दो लाख रुपये व्यक्तिगत ऋण उपलब्ध कराया जाएगा। उप मुख्यमंत्री सह वित्त मंत्री सुशील कुमार मोदी ने उक्त निर्देश ग्रामीण बैंकों के चेयरमैन व वरीय अधिकारियों को दिया।
किसानों से समय पर ऋण वापसी की अपील करते हुए उप मुख्यमंत्री ने कहा कि समय पर ऋण वापस नहीं करने के कारण 90 प्रतिशत किसानों को केंद्र सरकार के 3 और राज्य सरकार के देय 1 प्रतिशत यानी कुल 4 प्रतिशत ब्याज अनुदान का लाभ नहीं मिल पाता है। इस कारण 11 से 12 प्रतिशत तक ब्याज का भुगतान करना पड़ता है।
ग्रामीण बैंकों की ओर से वितरित किए जाने वाले ऋण का 65 प्रतिशत किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) धारकों को दिया जाता है। बैंक केसीसी धारक किसानों को रुपे कार्ड (एटीएम) उपलब्ध कराता है, लेकिन 10 से 15 प्रतिशत किसान ही इसका उपयोग करते हैं।
बैंकों को मुद्रा लोन के अंतर्गत लोगों को 50 हजार से 5 लाख तक कर्ज देने का निर्देश उप मुख्यमंत्री ने दिया क्योंकि आमतौर पर बैंक इस स्कीम के तहत 50 हजार का ही कर्ज देते हैं, जिससे किसी व्यापार को शुरू करना और चलाना संभव नहीं है। तीनों ग्रामीण बैंक अपनी 2,110 शाखाओं और 5,555 बैंक मित्र के जरिए ग्रामीणों को बैंकिंग सेवा उपलब्ध करा रहे हैं।