पटना। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने राजगीर में तीन दिवसीय (11-13 जनवरी) धर्म-धम्म सम्मेलन का उद्घाटन किया। सम्मेलन का आयोजन नालंदा विश्वविद्यालय और इंडिया फाउंडेशन ने किया है। धर्म-धम्म सम्मेलन में 11 बौद्ध देशों के प्रतिनिधि शिरकत कर रहे हैं।
राष्ट्रपति ने कहा कि नालंदा की अंतरराष्ट्रीय पहचान है। सम्मेलन का उद्देश्य धार्मिक परंपरा को जागृत करना है। धम्म शांति का एक प्रमुख स्रोत है। धर्म-धम्म परंपरा में राज्य और सामाजिक विषयों पर चर्चा होगी। उन्होंने बताया कि सम्मेलन का समय उपयुक्त है। जनवरी का महीना भारत-आसियान संबंधों का उत्सव है। गणतंत्र दिवस पर आयोजित समारोह में सभी आसियान देशों के नेता मुख्य अतिथि होंगे। एशिया के अन्य भागों में जहां भी धर्म-धम्म के पद चिन्ह हैं, वे हमारे अतीत का एक साझा स्रोत हैं। यह सम्मेलन और नया नालंदा विश्वविद्यालय उस विचारधारा का प्रतीक हैं, जिसका हम अनुकरण करते हैं।
मुख्यमंत्री : मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा है कि प्राचीन काल में विश्व के कई देशों से शिक्षा प्राप्त करने लोग नालंदा विश्वविद्यालय आते थे। उस समय पहला बौद्ध सम्मेलन राजगीर में ही हुआ था। इसकी पुनरावृत्ति आज फिर से इस सम्मेलन से हुई है। राजगीर को भी विश्व धरोहर में शामिल किया जाना चाहिए। राजगीर ऐतिहासिक जगह है। यहां भगवान बुद्ध ने उपदेश दिया है। राजगीर में स्टेट हाउस बनेगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने 2007 में एक्ट बनाकर नालंदा विवि के जीर्णोद्धार का प्रयास शुरू किया था। इच्छा है कि नालंदा विश्वविद्यालय का खंडहर भी नालंदा अंतरराष्ट्रीय विवि के साथ एसोसिएट हो जाए।
कार्यक्रम में श्रीलंका के विदेशमंत्री तिलक मारापाना, थाइलैंड के संस्कृति मंत्री वीरा रोजपालेजचानरत, राज्यपाल सत्यपाल मल्लिक, उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी, नालंदा विवि की कुलपति प्रो. सुनैना सिंह समेत कई देशों के प्रतिनिधि व गण्यमान्य लोग मौजूद थे।