पटना । पुलिस महानिदेशक पीके ठाकुर ने पुलिस अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा है कि वे साइबर क्राइम के ट्रेंड पर नजर रखें। हाल के वर्षों में जिस तेजी से साइबर क्राइम की घटनाएं बढ़ी हैं, उसके अनुसार यह टाॅप क्राइम हो जाएगा। बिहार में नालंदा-शेखपुरा के सीमावर्ती जिलों में यह गिरोह सक्रिय है। पुलिस अधिकारियों का इस पर रोकथाम के लिए साइबर अपराधियों से आगे सोचना चाहिए। वह नियोजन भवन में पुलिस अधिकारियों के सात दिवसीय साइबर प्रशिक्षण कार्यक्रम के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहेे थे। कार्यक्रम का आयोजन सी डैक व ईओयू बिहार ने किया है।
डीजीपी ने कहा कि अर्थव्यवस्था डिजिटलाइजेशन की ओर बढ़ रही है। इस कारण चुनौती और भी ज्यादा है। गृह मंत्रालय में इसके लिए एक अलग से कोषांग बन रहा है। साइबर स्पेस का आयाम काफी बड़ा है और पड़ताल कठिन। अपराध की ओर कई प्रोफेशनल गैंग तैयार हो रहे हैं। एटीएम तोड़ने की घटनाएं भी सामने आ रही हैं। मिनटों में बड़ी रकम मिलने से यह ट्रेंड बढ़ रहा है। लोगों में भी इस अपराध पर नियंत्रण को लेकर जागरूकता बढ़ी है। उन्होंने 21 जनवरी को बाल विवाह व दहेज प्रथा के खिलाफ आयोजित मानव श्रृंखला में शामिल होने की अपील अधिकारियों से की।
डीजी (प्रशिक्षण) : डीजी (प्रशिक्षण) केएस द्विवेदी ने संबोधन में कहा कि साइबर क्राइम की घटनाएं अगले तीन साल में बढ़ने वाली है। इसके अनुसार हमें सजग रहना होगा। आज हर आदमी किसी न किसी तरह इसका शिकार है। तकनीक पर निर्भरता बढ़ने के कारण अपराध बढ़ रहा है। आईटी एक्ट के तहत अधिकतम 10 साल की सजा है।
एडीजी (आर्थिक अपराध इकाई) : एडीजी (ईओयू) जीएस गंगवार ने बताया कि साइबर अपराध पर नियंत्रण के लिए हर जिले में एक यूनिट व बड़े जिलों में चार यूनिट का प्रस्ताव गृह विभाग को भेजा गया है। एक यूनिट में 10 लोगों की टीम काम करेगी। फिलहाल आधारभूत संरचना नहीं होने के कारण परेशानी हो रही है। सात दिवसीय प्रशिक्षण का लाभ लेने की अपील अधिकारियों से की।
श्रम संसाधन विभाग के प्रधान सचिव दीपक कुमार सिंह ने भी अपने विचारों को रखा।
मौके पर एडीजी (लाॅ एंड आॅर्डर) आलोक राज, एडीजी (सिविल डिफेंस) एके आंबेडकर, एएसपी (ईओयू) सुशील कुमार, आईटी एक्सपर्ट मनु जकारिया, एस्ट्रिक कंप्यूटर के सीईओ पीके सिन्हा समेत कई अधिकारी मौजूद थे।