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जागरूकता से ही सामाजिक कुरीतियों का उन्मूलन संभव  

पटना । मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि मानव श्रृंखला जैसे आयोजन से लोगों में उत्साह का भाव बनता है। साथ ही इसका दूरगामी प्रभाव भी जाता है । यह एक सांकेतिक कार्यक्रम है । बाल विवाह एवं दहेज प्रथा समाज के लिए नुकसानदायक हैं । जागरूकता से ही सामाजिक कुरीतियों का उन्मूलन होगा । इन पर रोकथाम के लिए कानून पहले से हैं । बावजूद ये कुप्रथाएं जारी हैं । सिर्फ कानून बना देने से ही रोकथाम संभव नहीं है। इसके लिए लोगों को आगे आना होगा । गत वर्ष 2 अक्टूबर से राज्य सरकार ने दोनों कुरीतियों के उन्मूलन के लिए कार्यक्रम शुरू कर दिया है । उक्त  बातें उन्होंने  गांधी मैदान में बाल विवाह एवं दहेज प्रथा उन्मूलन के समर्थन में आयोजित  मानव श्रृंखला के बाद प्रेस प्रतिनिधियों  से कहीं ।

मुख्यमंत्री ने न्याय के साथ विकास की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि विकास के साथ सामाजिक कुरीतियों पर भी प्रहार होता रहेगा । दहेज प्रथा के कारण ही बाल विवाह है । बाल विवाह का असर महिलाओं के स्वास्थ्य पर और इसका दूरगामी प्रभाव बच्चे पर दिखता है। इसकी वजह गरीबी, अशिक्षा एवं सामाजिक परंपरा है । उन्होंने सभी लोगों से आगे आने का आह्वान किया । शराबबंदी से आज घर-घर में खुशहाली है । पूर्णिया में इसका अच्छा प्रभाव दिखा है । इन कुरीतियों के उन्मूलन के प्रभाव का आकलन सरकार के साथ स्वतंत्र एजेंसियां भी कर रही हैं ।

डिप्टी सीएम : उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने मानव श्रृंखला को सफल बनाने के लिए बिहारवासियों को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि दहेज प्रथा और बाल विवाह एक सामाजिक कुरीति है, जिसका खात्मा केवल कानून से संभव नहीं है । 1872 में बंगाल के समाज सुधारक केशवचंद्र सेन के प्रयास से स्पेशल मैरेज एक्ट बना था, जिसके तहत शादी के लिए लड़की की उम्र 14 और लड़के की 18 वर्ष तय की गई थी । 57 वर्षों  के बाद 1929 में शारदा एक्ट के जरिए लड़की और लड़के की शादी की उम्र 18 और 21 वर्ष कर दी गई ।

उन्होंने कहा कि सिर्फ कानून बना देने मात्र से बाल विवाह पर रोक लग जाती, तो डेढ़ सौ साल पहले बने कानून के बावजूद बिहार जैसे राज्य में आज भी सौ में 39 लड़कियां बाल विवाह का शिकार नहीं होती। सती प्रथा जैसी कुरीति का अंत केवल कानून से नहीं बल्कि सामाजिक जनचेतना से ही संभव हो सका था। बाल विवाह की मूल वजह दहेज प्रथा है। बच्ची की उम्र ज्यादा होने पर दहेज देना पड़ेगा । इसलिए लोग बाल विवाह कर देते हैं। वहीं बाल विवाह की वजह से ही शिशु मृत्यु और मातृत्व मृत्यु दर अधिक है।


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