पटना । किसान एवं जनप्रतिनिधियों से बैंकों से संतोषजनक सहयोग नहीं मिलने की शिकायत मिली है। सूबे में मात्र 42 प्रतिशत ही साख-जमा अनुपात (सीडी रेशियो) है। बैंक जिलों में किसानों को ऋण देने के लिए संभावनाओं की तलाश नहीं करते हैं । सीडी रेशियो को बढ़ाने के लिए बैंक क्या प्रयास कर रहे हैं। इन सभी मसलों पर कृषि मंत्री डाॅ प्रेम कुमार की अध्यक्षता में राज्यस्तरीय बैंकर्स समिति (एसएलबीसी) की कृषि उपसमिति की बैठक हुई।
कृषि मंत्री ने बैंक प्रतिनिधियों से अपील करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री के संकल्प 2022 तक किसानों की आय को दोगुनी करने तथा मुख्यमंत्री का सपना हर भारतवासी की थाल में बिहार का एक व्यंजन हो कोे साकार करने में सहयोग करें।
बैठक में किसान क्रेडिट कार्ड, कृषि ऋण, बैंकों से संबद्ध कृषि विभाग की विभिन्न योजनाओं की समीक्षा हुई। इस अवसर पर कृषि उत्पादन आयुक्त सुनिल कुमार सिंह, प्रधान सचिव सुधीर कुमार, कृषि निदेशक हिमांशु कुमार राय, वित्त विभाग के संयुक्त सचिव उदयन मिश्रा, नाबार्ड के एजीएम एमएम अशरफ, एसएलबीसी के संयोजक राजीव कुमार दास एवं सभी व्यावसायिक एवं क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के पदाधिकारी उपस्थित थे।
डाॅ प्रेम कुमार ने कहा कि सूबे में अंडा उत्पादन, मत्स्य, बकरी व मुर्गी पालन की अच्छी संभावनाएं हैं। साथ ही विशेष फसलों को प्रोत्साहित करने में भी बैंकों के सहयोग की जरूरत है। उन्होंने इसकी समीक्षा के लिए अलग से बैठक का निर्देश दिया। किसानों को कृषि ऋण उपलब्ध कराने के लिए काॅलेटरल सिक्युरिटी की सीमा 1 लाख से बढ़ाकर 3 लाख रुपये करने के लिए वित्त विभाग के प्रतिनिधि को आवश्यक कार्रवाई का निर्देश दिया।
उन्होंने कहा कि किसानों के हित में कृषि यांत्रिकीकरण, बागवानी विकास व जैविक प्रोत्साहन जैसी बैंक आधारित योजनाओं में बैंकों को ऋण देने में कोताही नहीं बरतनी चाहिए। कौशल विकास प्रशिक्षण के माध्यम से लगभग 4500 ग्रामीण युवा कौशल विकास प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। उन्हें प्रशिक्षण के बाद बैंक से संबद्ध कर कृषि उद्यमिता का विकास करना चाहिए। बिहार में करीब 1 करोड़ 61 लाख कृषक हैं, जबकि 60 लाख किसानों के पास ही किसान क्रेडिट कार्ड है। बैंकों को एक अभियान चलाकर सभी किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड के अंतर्गत लाने का प्रयास करना चाहिए।
किसानों के ज्वांइट लायबिलिटी ग्रुप (जेएलजी) में भी विगत वर्षों में ऋण देने में कमी आई है। जब से भूमि से संबंधित खाता-खेसरा की मांग की जाने लगी है, तब से बटाईदार-भूमिहीन कृषकों को ऋण मिलने में परेशानी हो रही है। जलछाजन की 532 परियोजनाओं के लिए रूरल इन्फ्रास्टक्चर डेवलपमेंट फंड (आरआईडीएफ) के अंतर्गत वित्त पोषण हेतु नाबार्ड के प्रतिनिधि के साथ शीघ्र बैठक करने के लिए भूमि संरक्षण विभाग के निदेशक को निर्देश दिया। डीबीटी से अनुदान राशि किसानों के खाते में 15 दिनों में भेजने का भी निर्देश दिया।