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बिहार में ही कृषि यंत्रों के निर्माण में सहयोग करें निर्माता

पटना । कृषि मंत्री डाॅ प्रेम कुमार ने फसल उत्पादन बढ़ाने में कृषि यंत्रों की भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि यंत्रों के उपयोग से मानव श्रम एवं समय की बचत होती है। किसानों की आवश्यकता के अनुसार अधिकतर कृषि यंत्र राज्य में ही निर्मित हो। इसके लिए कृषि यंत्र निर्माताओं से सहयोग की उम्मीद है। बामेती सभागार मेें वह विभिन्न राज्यों से आए कृषि यंत्र निर्माताओं को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि सूबे में छोटे तथा मंझोले किसान तथा उनके छोटे-छोटे खेत में कृषि यांत्रिकरण को बढ़ावा देने के लिए तीसरे कृषि रोड मैप में 1351.54 करोड़ रुपये का प्रावधान है। इस वर्ष 180 करोड़ रुपये किसानों को 71 कृषि यंत्र की खरीद पर अनुदान के रूप में दिया जा रहा है। सरकार भी कृषि यंत्र निर्माताओं की समस्याओं के समाधान के लिए प्रयास करेगी। 
राज्य में ही कृषि यंत्रों के निर्माण से जहां एक ओर उद्योग को बढ़ावा मिलेगा, वहीं युवाओं को रोजगार का अवसर मिलेगा। स्थानीय स्तर पर कृषि यंत्रों के निर्माण से लागत मूल्य भी कम होगा। डाॅ प्रेम ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि केंद्र सरकार न बिहार में फार्म मशीनरी ट्रेनिंग एंड टेस्टिंग इंस्टीच्यूट की स्थापना को मंजूरी दी है। इसके लिए राज्य सरकार ने 10 एकड़ जमीन भी पूसा में उपलब्ध करा दी है। शीघ्र ही यह संस्थान कार्य करने लगेगा। 
 

कृषि उत्पादन आयुक्त सुनिल कुमार सिंह ने कहा कि देश में उत्पादित कृषि यंत्र का 10 फीसदी खपत बिहार में होता है। इसलिए राष्ट्रीय स्तर की यंत्र निर्माण कंपनी बिहार में अपनी उत्पादन इकाई स्थापित करेें। 
प्रधान सचिव सुधीर कुमार ने कंपनियों के प्रस्तुतीकरण में राज्य के रकबा के आकार के अनुसार यंत्रों में मोडिफिकेशन का अनुरोध किया। 
कार्यक्रम में कृषि निदेशक हिमांशु कुमार राय, बामेती के संयुक्त निदेशक गणेश राम, संयुक्त निदेशक (अभियंत्रण) आरकेवर्मा, कई राज्यों के लगभग 100 कृषि यंत्र निर्माता व कृषि विभाग के अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे। 
 


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