पटना । बिहार में ऋण-जमा अनुपात (सीडी रेशियो) करीब 43 फीसदी है जबकि राष्ट्रीय स्तर पर यह अनुपात 73.6 फीसदी है। सीवान, सारण, गोपालगंज, भोजपुर व मुंगेर जिलों में सीडी रेशियो 30 फीसदी से नीचे है। इसके विपरीत कैमूर (70 फीसदी),पूर्णिया (61.45 फीसदी), किशनगंज व खगड़िया (55 फीसदी) जिलों की स्थिति बेहतर है। जिलों में सीडी रेशियो में अंतर की समीक्षा होगी। उक्त जानकारी उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने दी। वह होटल मौर्या में आयोजित अग्रणी बैंक योजना परिचर्चा के बाद प्रेस प्रतिनिधियों को संबोधित कर रहे थे।
उप मुख्यमंत्री ने बताया कि 9 फरवरी को एसएलबीसी की बैठक होगी, जिसमें दिसंबर 2017 तक विभिन्न योजनाओं में ऋण वितरण प्रगति की समीक्षा होगी। उद्योग व व्यापार से जुड़े एसोसिएशन भी बैठक में शामिल होंगे। बिहार में ऋण माफी की कोई योजना नहीं है। बड़े ऋण लेने वालों की तुलना में सेल्फ हेल्प ग्रुप (एसएचजी) से लोन रिकवरी बेहतर है। सितंबर 2017 तक बैंकों का एनपीए 11.25 फीसदी है।
अग्रणी बैंक योजना परिचर्चा में जिलों से वरीय उपसमाहर्ता (बैंकिंग), अग्रणी जिला पदाधिकारी (आरबीआई), जिला विकास प्रबंधक (नाबार्ड) एवं अग्रणी जिला प्रबंधक मौजूद थे। अधिकारियों से उनके जिलों में केसीसी, स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड, मुद्रा व जनधन समेत कई योजनाओं की स्थिति पर विस्तृत चर्चा हुई। उप मुख्यमंत्री ने जिलों के चारों समूहों में समन्वय व नियमित बैठक के साथ एसीपी के लक्ष्य को प्राप्त करने का निर्देश दिया। जिलों में कार्यरत नाॅन बैंकिग कंपनियों की गतिविधियों पर भी कड़ी नजर रखने की हिदायत दी। डिजिटल ट्रांजेक्शन पर जोर देते हुए कहा कि बिहार का लक्ष्य 148 करोड़ है। इसे बढ़ावा देने के लिए काॅलेज-स्कूलों में भी शिविर लगे। आरबीआई के निर्देशानुसार बैंकों को ग्राहकों से सिक्के सहज लेना चाहिए।
मौके पर वित्त विभाग की प्रधान सचिव सुजाता चतुर्वेदी, आरबीआई व नाबार्ड के महाप्रबंधक समेत कई अधिकरी मौजूद थे।