पटना । मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि कृषि वानिकी का उद्देश्य किसानों की आमदनी बढ़ाना है। सिर्फ खेती से ही आय नहीं बढे़गी। इसके साथ पौधारोपण भी जरूरी है। पर्यावरण मेेें आ रहे बदलाव के मद्देनजर हरित आवरण को बढ़ाना सबकी जिम्मेवारी है। सरकार भी अपने स्तर से काफी प्रयास कर रही है। तीसरे कृषि रोड मैप में हरित आवरण का लक्ष्य 17 फीसदी रखा गया है। दूसरे कृषि रोड मैप का लक्ष्य 15 फीसदी शीघ्र पूरा हो जाएगा। उक्त बातें वह ज्ञान भवन में आयोजित कृषि वानिकी समागम में कह रहे थे। समागम में सूबे के किसान बड़ी संख्या में मौजूद थे। आयोजन पर्यावरण व वन विभाग ने किया था।
मुख्यमंत्री ने कहा कि समागम में किसानों से विमर्श के बाद जो भी बेहतर सुझाव आएंगे। उस आधार पर राज्य की अपनी कृषि वानिकी नीति तैयार होगी। 2012 में अपने चीन दौरे की चर्चा करते हुए कहा कि वहां सही तरीके से पौधारोपण हुआ है। इसका लाभ चीन की अर्थव्यवस्था को मिल रहा है।
बिहार विभाजन के बाद सूबे में वन क्षेत्र करीब 8 फीसदी है, जो काफी कम है। वन क्षेत्र चंपारण और बिहार-झारखंड की सीमा में ही है। इसे बढ़ाना जरूरी है। इसका असर पर्यावरण पर भी दिख रहा है। सूबे में औसत बारिश 800-900 मिलीमीटर है। यह औसत से काफी कम है। गंगा-सोन की अविरलता पर भी संकट है । पर्यावरण व कुदरत की रक्षा करना हम सबका कर्तव्य है। यदि हम अगली पीढ़ी को खुश देखना चाहते हैं, तो हमें इस दिशा में सक्रिय होना होगा।
128 किसान हुए सम्मानित : कृषि वानिकी के क्षेत्र में बेहतर काम करने वाले 128 किसानों को सम्मानित किया गया। हालांकि समय अभाव के कारण सीएम ने पांच किसानों को ही सम्मानित किया। सम्मानित होने वालों में विजय कुमार पांडेय ( चंपारण), सौरभ कुमार (भागलपुर), हामिर खां (सीवान), मुन्ना सिंह पटेल (कैमूर), परमानंद सिंह (नालंदा)।
मौके पर डिप्टी सीएम सुशील कुमार मोदी, कृषि मंत्री डाॅ प्रेम कुमार, जल संसाधन मंत्री राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह, प्रधान सचिव त्रिपुरारी शरण व सुधीर कुमार, प्रधान मुख्य वनसंरक्षक डीके शुक्ला, सीएम के सचिव मनीष वर्मा एवं ओएसडी डाॅ गोपाल सिंह मौजूद थे।