पटना । बिहारवासियों का बैंकों में 2 लाख 90 हजार करोड़ जमा है। इसके विपरीत बैंकों ने 1 लाख 25 हजार करोड़ का ही कर्ज दिया है। इस कारण बिहार का साख-जमा अनुपात 41.67 फीसदी है। 30 फीसदी से कम साख-जमा अनुपात वाले भोजपुर, सारण, सीवान और गोपालगंज जिलों की समीक्षा करने का निर्देश उप मुख्यमंत्री सह वित्त मंत्री सुशील कुमार मोदी ने दिया है। वह होटल चाणक्य में आयोजित राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (एसएलबीसी) की तिमाही समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे।
1 लाख 10 हजार करोड़ वार्षिक साख योजना के विरुद्ध बैंकों ने दिसंबर तक 72,215 करोड़ (66.56 प्रतिशत) ऋण वितरित किया है। उप मुख्यमंत्री ने बैंकों को 2017-18 की वार्षिक साख योजना का कम से कम 95 फीसदी लक्ष्य पूरा करने का निर्देश दिया। मुद्रा योजना के अंतर्गत 50 हजार से 5 लाख तक के अधिक से अधिक लोन बांटने, ग्राहकों से सिक्का जमा लेने के लिए हर जिले में एक बैंक चिन्हित करने, जिला व प्रखंड स्तर पर होने वाली बैंकर्स कमिटी की बैठक में बैंक के वरीय अधिकारियों केे शामिल होने तथा नाॅन बैंकिंग कंपनियों की गतिविधियों की जानकारी सरकार को देने का भी निर्देश दिया।
मोदी ने बताया कि खरीफ मौसम में किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) उपलब्ध कराने के लिए जिलों में शिविर लगेंगे। 5 हजार की आबादी वाले शेष बचे 232 गांवों में वित्तीय वर्ष के अंत तक बैंक आउटलेट खुल जायेंगे। दिसंबर तक ऐसे 370 आउटलेट खुल चुके हैं। राज्य के दो करोड़ छात्र-छात्राओं को सरकार की विभिन्न योजनाओं की राशि डीबीटी के जरिए ट्रांसफर में हो रही परेशानी को दूर करने के लिए एक कमिटी बनाने का निर्देश दिया गया, जिसकी बैठक अगले महीने के प्रथम सप्ताह में होगी।
उन्होंने कहा कि बिहार में सभी बैंकों की 6,876 शाखाएं कार्यरत हैं, जिनमें 3490 ग्रामीण, 1,966 अर्ध शहरी और 1,420 शहरी क्षेत्रों में हैं। 1.19 लाख स्वयं सहायता समूहों (एचएचजी) को 2 हजार करोड़ का कर्ज दिया गया है, जिनकी कर्ज वापसी दर 98 फीसदी है।
मौके पर प्रधान सचिव सुजाता चतुर्वेदी व आरके महाजन, महिला विकास निगम की एमडी एन विजय लक्ष्मी व बैंकों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।