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प्रकृति से संतुलन बना कर चलें, नहीं तो अफसोस करना पड़ेगा

पटना । उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा कि आज प्रकृति व विकास के बीच टकराव की स्थिति है। विकास की कीमत प्रकृति व पर्यावरण के नुकसान के रूप में चुकानी पड़ रही है। पर्यावरण असंतुलन के कारण कृषि, स्वास्थ्य और मौसम प्रभावित हो रहा है। ऐसे में हम सबका दायित्व है कि प्रकृति के साथ तारतम्य बना कर अगली पीढ़ी के लिए बेहतर धरती देकर जाएं। उक्त बातें उन्होंने विश्व संवाद केंद्र, पटना की ओर से प्रकाशित स्मारिका ‘रत्नगर्भा’ के विमोचन के अवसर पर कहीं।   

मोदी ने कहा कि पिछले साल 10 नंबर से पहले खगड़िया व अन्य इलाकों में मक्के की बुआई की गई, लेकिन तापमान में भारी गिरावट के कारण बाली में दाना नहीं आया। तापमान असंतुलन के कारण ही इस बार वायरल बुखार ने पांच की जगह सात दिनों तक लोगों को परेशान किया। 2017 में अररिया व किशनगंज में अतिवृष्टि से बाढ़ की तबाही आयी। जिन इलाकों में कभी बाढ़ नहीं आती थी, वहां भी 5-6 फुट तक पानी भर गया। 

दुनिया के कई हिस्सों में जलसंकट की स्थिति है। सौभाग्य है कि पटना में 24 घंटे पानी उपलब्ध है। चेन्नई, हैदराबाद, रायपुर, जमशेदपुर जैसे शहरों को विकास की कीमत चुकानी पड़ी है। कोसी व गंगा अपनी धारा से दूर हो गई है। केंद्र  सरकार ‘नामामि गंगे’ के तहत गंगा की अविरलता और स्वच्छता के लिए कई योजनाएं चला रही है। गंगा किनारे के शहरों में एसटीपी का निर्माण, गांवों को ओडीएफ बनाने और बड़े पैमाने पर पौधारोपण का अभियान चल रहा है। हमें अपनी आदतों व व्यवहार में बदलाव लाने की जरूरत है।

मौके पर विश्व संवाद केंद्र के अध्यक्ष प्रकाश नारायण सिंह, सचिव सह विधायक डाॅ संजीव चौरसिया एवं संपादक संजीव कुमार समेत कई गण्यमान्य मौजूद थे।   
 


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