नई दिल्ली/पटना । प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति ने पुनर्गठित राष्ट्रीय बांस मिशन को स्वीकृति दे दी । साथ ही कच्चे जूट के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में 200 रुपये की वृद्धि को भी मंजूरी मिल गई । जूट का न्यूनतम समर्थन मूल्य अब 3700 रुपये प्रति क्विंटल हो जाएगा ।
बिहार को भी होगा लाभ : आर्थिक मामलों की समिति ने पुनर्गठित राष्ट्रीय बांस मिशन (एनबीएम) को स्वीकृति दी है । 14वें वित्त आयोग की शेष अवधि (2018-19 तथा 2019-20) के दौरान मिशन उन राज्यों में जहां बांस के सामाजिक, वाणिज्यिक और आर्थिक लाभ हैं, वहां बांस के विकास पर फोकस करेगा । इसके लिए 1290 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। । पूर्वोत्तर क्षेत्र पर खास नजर रहेगी । इसका लाभ बिहार को भी मिलेगा।
योजना से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से किसान, स्थानीय दस्तकार और बांस क्षेत्र में काम कर रहे लोगों को फायदा होगा । राष्ट्रीय बांस मिशन केंद्र प्रायोजित योजना के रूप में 2006-07 में शुरू किया गया था ।
एमएसपी हुआ 3700 रुपये : 2018-19 मौसम के लिए शुद्ध औसत क्वालिटी (एफएक्यू) के कच्चे जूट का न्यूनतम समर्थन मूल्य 200 रुपये बढ़ाकर 3700 रुपये प्रति क्विंटल किया गया है । यह मूल्य 2017-18 में प्रति क्विंटल 3500 रुपये था । भारतीय जूट निगम जूट उत्पादक राज्यों में न्यूनतम समर्थन मूल्य पर मूल्य समर्थन संचालन के लिए केंद्रीय नोडल एजेंसी के रूप में कार्य करता रहेगा । कच्चे जूट का न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ने से बिहार, बंगाल और असम के किसानों को फायदा होगा। ये राज्य देश में जूट का 95 फीसदी उत्पादन करते हैं।