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मुद्रा योजना के तहत लक्ष्य से करीब दोगुना उपलब्धि 

पटना/बिहार कारोबार न्यूज । मुद्रा योजना के तहत बैंकों की उपलब्धि लक्ष्य से दोगुना रही है। 5375 करोड़ लक्ष्य से करीब दोगुना 9598 करोड़ का ऋण 11 लाख लोगों को दिया गया। अब तक बिहार में 30 लाख लोगों को 21,316 करोड़ का मुद्रा ऋण दिया गया है। 

राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति की बैठक के बाद उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा कि बैंकों को इस साल 2.5 लाख स्वयं सहायता समूहों को ऋण देने का निर्देश दिया गया है। 1.96 लाख एसएचजी को 2364 करोड़ का ऋण देकर बैंकों ने लक्ष्य का 99 प्रतिशत हासिल किया है। एसएचजी ऋण वापसी की दर 96 प्रतिशत है। 

प्रधानमंत्री जनधन योजना के तहत 2017-18 में 63.26 लाख खाते खोले गए, जिनमें 3.4 करोड़ रुपये जमा है। प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना के तहत 54.76 लाख लोगों ने बीमा कराया है। अब तक 1493 क्लेम के विरूद्ध 1115 का भुगतान हो चुका है। प्रधानमंत्री जीवन ज्योति योजना के अंतर्गत 14.75 लाख लोग बीमित हैं जिनमें 3105 दावे के विरुद्ध 2691 का भुगतान हो चुका है। अटल पेंशन योजना में बिहार के 9 लाख 46 हजार लोग शामिल हैं।   

बैंकों को 2018-19 की वार्षिक साख योजना 1 लाख 30 हजार करोड़ के लक्ष्य को हासिल करने का निर्देश दिया। साख-जमा अनुपात बढ़ा कर 50 प्रतिशत से अधिक करने, सुदूरवर्ती इलाकों में बैंक शाखा खोलने, बैंकों की शाखावार समीक्षा तथा डीबीटी में आ रही परेशानियों को दूर करने का भी निर्देश दिया। स्वयं सहायता समूह को लक्ष्य के 99 प्रतिशत तक ऋण उपलब्ध कराने व प्राइवेट और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों की अलग से बैठक कर समीक्षा की जायेगी। आरबीआई ने स्पष्ट कर दिया है कि बैंकों में सिक्का जमा करने की कोई सीमा नहीं है।  

बिहार के जिन जिलों में वार्षिक साख योजना की उपलब्धि 80 फीसदी से कम रही है उनकी समीक्षा करने का बैंकों के वरीय अधिकारियों को निर्देश दिया गया। विगत वर्ष 2017-18 में 1.10 लाख करोड़ ऋण वितरण के लक्ष्य के विरुद्ध बैंकों ने 99,934 करोड़ (90.85 प्रतिशत) वितरित किया, जो 2016-17 के 89.91 से अधिक है। मधेपुरा में साख योजना का 61 प्रतिशत, सुपौल में 68 और सहरसा में 70 प्रतिशत ऋण बांटे गए जबकि सीतामढ़ी, बांका, मधुबनी आदि में भी उपलब्धि 80 प्रतिशत से कम रही है।

इसी तरह साख-जमा अनुपात 2017-18 में 45.38 प्रतिशत रहा है। दरभंगा (32 प्रतिशत), गोपालगंज (29.4), मुंगेर (30), सीवान (28.90), सारण (28.42), गया (36.66) और भोजपुर (30.26) प्रतिशत साख-जमा अनुपात हैं। ऐसे कुछ जिलों का दौरा कर जानने की कोशिश की जायेगी कि यहां साख-जमा अनुपात कम क्यों हैं ?


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