पटना/बिहार कारोबार न्यूज । अंतर्राष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान (आईआरआरआई) , मनीला (फिलीपींस) के महानिदेशक डॉ मैथ्यू मोरेल ने बताया कि संस्थान बिहार में अधिक पौष्टिक चावल (बायो-फोर्टिफाईड) के उत्पादन में मदद करेगा। इसमें जस्ता और लोहे की मात्रा अधिक होती है। संस्थान का मकसद उपभोक्ता के स्वास्थ्य में सुधार लाना, फसल की उत्पादकता बढ़ाने के साथ किसानों की आय में वृद्धि करना है। डॉ मैथ्यू बिहार के दौरे पर हैं। विकास भवन में कृषि मंत्री डाॅ प्रेम कुमार से उन्होंने बिहार में धान की खेती को और अधिक प्रोत्साहित करने के संबंध में चर्चा की।
डॉ मैथ्यू ने कहा कि बढ़ती आबादी एवं जलवायु परिवर्तन जैसी परिस्थितियों के कारण वाराणसी में आईआरआरआई साऊथ एशिया रीजनल सेंटर (आइसार्क) की स्थापना करना उचित है। सरकार के सहयोग से सेंटर खाद्य और पोषण स्थिरता का काम करने और उससे जुड़ी समस्याओं का हल देने में मददगार होगा।
डाॅ सुगंधा मुंशी ने बताया कि आईआरआरआई की वेबसाईट पर मुजफ्फरपुर जिला के बांद्रा प्रखंड की महिला किसानों की सफलता की कहानी है। आने वाले समय में कृषि में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए कृषि विभाग एवं जीविका के साथ मिलकर और कार्य करेगा ।
कृषि मंत्री : कृषि मंत्री डाॅ प्रेम कुमार ने कहा कि बिहार के कृषि रोडमैप के अनुसार 76 फीसदी आबादी कृषि क्षेत्र पर निर्भर है। आइसार्क जैसे अनुसंधान केंद्र की स्थापना से बिहार में किसानों की आमदनी बढ़ाने, आजीविका में सुधार लाने और खाद्य एवं पोषण सुरक्षा पाने में सहयोग मिलेगा। राज्य सरकार के सहयोग से बिहार कृषि विश्वविद्यालय सबौर, कृषि विभाग एवं राज्य की एजेंसी किसानों के आर्थिक विकास में सहयोग देने का प्रयास करेंगे।
बैठक में साऊथ एशिया के प्रतिनिधि डाॅ नफीस, वरिष्ठ वैज्ञानिक डाॅ अरविंद कुमार, बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर के निदेशक (प्रसार शिक्षा) डाॅ आरके सोहाने, निदेशक ( अनुसंधान) डाॅ पीके सिंह, निदेशक (बीज एवं प्रक्षेत्र) डाॅ रेवती रमण, धान वैज्ञानिक डाॅ एसपी सिंह भी मौजूद थे।