पटना/बिहार कारोबार न्यूज । बिहार की नदियां खास कर गंगा में सिल्ट (गाद) की अधिकता से काफी नुकसान हो रहा है। गंगा की निर्मलता के साथ इसकी अविरलता पर भी ध्यान देना होगा। सिल्ट को निकालने से नहीं बल्कि उसे प्रवाह देने से यह समस्या दूर होगी। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उक्त बातें ज्ञान भवन में आयोजित दो दिवसीय ‘इस्ट इंडिया क्लाइमेट चेंज काॅन्क्लेव 2018’ में कहीं। काॅन्क्लेव में बिहार, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल, उड़ीसा, झारखंड एवं असम सरकार के प्रतिनिधि एवं विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं।
सीएम ने कहा कि राज्य में प्राकृतिक आपदा से होने वाले नुकसान में वृद्धि के विश्लेषण में जलवायु परिवर्तन के प्रभाव स्पष्ट दिख रहे हैं। पर्यावरण के साथ खिलवाड़ नहीं करने के बावजूद बिहार को हर साल बाढ़ और सूखा का सामना करना पड़ता है। 1980 से 2010 तक के 30 वर्षों में जहां बिहार की औसत बारिश 1027 मिमी थी, वहीं 2006-17 तक औसत बारिश 912 मिमी है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि बिहार जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से अवगत है तथा उससे निबटने के प्रयासों पर बल दे रहा है। तीसरे कृषि रोडमैप में जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निबटने के उपाय शामिल किए गए हैं। अनाज उत्पादन में संभावित बदलाव को ध्यान में रखकर ही राज्य सरकार नये क्रॉप पैटर्न को अपनाने पर अध्ययन कर रही है।
इस अवसर पर केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री डॉ हर्षवर्धन, डिप्टी सीएम सुशील कुमार मोदी, छत्तीसगढ़ के वन एवं विधि मंत्री महेश गागरा, प्रधान सचिव त्रिपुरारी शरण, सीएम के सचिव मनीष वर्मा, अंतरराष्ट्रीय स्तर के विशेषज्ञ और नीति निर्धारक शामिल थे।