सबौर (भागलपुर) । किसानों के इनोवेशन (खेती के दौरान किए गए प्रयोग) को व्यावसायिक स्तर देने के लिए उत्पाद के अनुसार छोटे-छोटे समूह बनाकर मूल्यांकन करने की आवश्यकता है। साथ ही अलग-अलग उत्पाद का गुणवत्ता परीक्षण भी होना चाहिए। 21वीं सदी में कृषि एवं पशुपालन क्षेत्रों को नवोन्मेषी एवं उन्नतशील बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस, सूचना प्रौद्योगिकी एवं इलेक्ट्रानिक्स के प्रयोग की सख्त जरूरत है। उक्त बातें पद्मश्री प्रोफेसर अनिल कुमार गुप्ता ने तीन दिवसीय राष्ट्रीय किसान विज्ञान कांग्रेस (5-7 अगस्त) के उद्घाटन समारोह के मौके पर कहीं। आयोजन बिहार कृषि विश्वविद्यालय में हो रहा है।
उन्होंने कहा इस तरह का कार्यक्रम किसानों की समस्याओं को समझने एवं तकनीकी विकास पद्धति को साझा करने में मददगार होगा। किसानों के नवाचार को नई दिशा एवं पहचान देने वाले संस्थानों के माध्यम से मूल्यांकन करने की आवश्यकता है, ऐसे में कृषि विज्ञान केन्द्र एक अहम भूमिका निभायेगा।
राष्ट्रीय कृषि विपणन संस्थान, जयपुर की निदेशक डाॅ हेमा यादव ने कहा कि किसानों के नवाचार को एक प्रभावी तरीके से देश के विभिन्न संस्थानों के साथ साझा करने एवं संबंधित किसानों सेे जोड़ना चाहिए। डाॅ केडी कोकाटे का कहना है आज की कृषि में आने वाली चुनौतियों के लिए किसानों द्वारा विकसित नवाचार वरदान साबित होगा। डाॅ भीभी सदामते ने कहा कि किसानों के नवाचारों को सूचीबद्ध एवं संरक्षित करने की आवश्यकता है।
डाॅ आरसी अग्रवाल का कहना है कि बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर इस कांग्रेस के माध्यम से देश के नवोन्मेषी किसानों को एक स्थान पर एकत्रित करने में अच्छी भूमिका निभा रहा है। डाॅ गोपाल जी त्रिवेदी ने भी ऐसे ही विचार रखे। बिहार कृषि विश्वविद्यालय के वीसी डाॅ अजय कुमार सिंह ने किसानों के नवाचार की प्रशंसा की और नवाचार की वैज्ञानिक पद्धति के मूल्यांकन पर जोर दिया।
कार्यक्रम के आयोजन में आई.सी.ए.आर. नई दिल्ली, राष्ट्रीय नवाचार संस्था, पी.पी.भी.एफ.आर.ए नई दिल्ली, राष्ट्रीय कृषि विपणन संस्थान जयपुर, बामेती पटना व नाबार्ड ने वित्तीय सहयोग प्रदान किया है। कार्यक्रम में 400 से अधिक किसान, वैज्ञानिक, कृषि आधारित उद्योगों के प्रतिनिधि व विद्यार्थी शिरकत कर रहे हैं।