सबौर (भागलपुर) । राष्ट्रीय किसान विज्ञान कांग्रेस का आयोजन कृषि विकास में मील का पत्थर साबित होगा। कृषि नवाचार, कृषि मूल्य, कृषि विपणन जैसे विभिन्न आयामों पर गहन चर्चा हो रही है। कुछ ठोस नतीजे इस विचार मंथन से आएंगे, जो आगे की योजना तैयार करने में मददगार होंगे। उक्त बातें कृषि मंत्री डाॅ प्रेम कुमार ने कहीं। वह सबौर में तीन दिवसीय राष्ट्रीय किसान विज्ञान कांग्रेस के दूसरे दिन के समारोह को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कृषि शिक्षा के क्षेत्र में बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर का विशिष्ट स्थान है। 17 अगस्त, 1908 को कृषि महाविद्यालय की स्थापना हुई थी। राज्य सरकार ने ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए 2010 में बिहार कृषि विश्वविद्यालय की स्थापना का निर्णय लिया। स्थापना के मात्र 8 वर्षों में इस विश्वविद्यालय ने सफलता के कई कीर्तिमान स्थापित किये।
रजिस्ट्रार जनरल डाॅ आरसी अग्रवाल ने कहा कि पौधा किस्म और कृषक अधिकार संरक्षण प्राधिकरण, नई दिल्ली का ध्यान बिहार पर ज्यादा है, जिससे अधिक से अधिक किसानों की प्रजातियों का रजिस्ट्रेशन हो सके।
पद्मश्री अनिल गुप्ता के सुझावों पर अपनाने पर जोर : कुलपति डाॅ अजय कुमार सिंह ने पद्मश्री प्रो अनिल कुमार गुप्ता के सुझावों पर विशेष जोर दिया। इनमें नवाचारों को बढ़ाने के लिए नेशनल इनोवेशन फंड, यूजी एवं पीजी लेवल पर इनोवेशन आधारित कोर्स, एक्सपर्ट सिस्टम एवं इनोवेशन नेटवर्क बनाने की बात है। उन्होंने कहा विश्वविद्यालय नवाचारी किसानों को एडजनक्ट प्रोफेसर के रूप में नियुक्त करेगा। साथ ही विश्वविद्यालय में विकसित उत्पाद जैसे के बायो फर्टिलाइजर एवं टिशु कल्चर केले की बिक्री भी बात रखी।
इस अवसर पर महिला आयोग की सदस्य डाॅ निक्की हेम्ब्रम, वरिष्ठ वैज्ञानिक डाॅ आरके मलिक, डाॅ विशाल नाथ, डाॅ एमएल जाट, डाॅ प्रीति शेखर, डाॅ आरके सोहाने एवं डाॅ आरएन सिंह भी अपने विचारों को रखा। नवाचारी किसानों पर आधारित एक पुस्तक का भी विमोचन किया गया।
इन्हें मिला सम्मान : हिमाचल प्रदेश के हरिशमन शर्मा को सेब की प्रजाति विकसित करने के लिए, छत्तीसगढ़ के लाखन लाल पटेल को सूर्यमुखी के बीज, महाराष्ट्र के अशोक मनवानी को मोती उत्पादन की नई विधि, भागलपुर के संजय को शहद उत्पादन, वैशाली के संजीव को फूलगोभी की प्रजाति विकसित करने, पटना के राम विनय को गाजर घास, जहानाबाद के योगेंद्र शर्मा को बीज भंडारण, सुपौल के भिखारी मेहता को जलकुंभी से वर्मी कंपोस्ट, रोहतास के अर्जुन सिंह को सब्जी बेचने की नई पद्धति एवं पूर्णिया के संतोष नायक को मशरूम उत्पादन के लिए सम्मानित किया गया।