मुख्य समाचार

किसान एवं वैज्ञानिकों के शोध को एकीकृत करने की जरूरत

सबौर (भागलपुर) । बिहार कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डाॅ अजय सिंह ने कहा कि किसानों के नवाचार (इनोवेशन) को वैज्ञानिक ढांचा देने एवं उद्यम में परिवर्तित करने के लिए इनोवेशन-इनक्यूबेशन सेंटर का प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजा जायेगा। साथ ही राष्ट्रीय नवप्रवर्तन संस्थान, अहमदाबाद के साथ करार होगा। राष्ट्रीय किसान विज्ञान कांग्रेस (5-7 अगस्त) में 310 नवाचारी किसान एवं वैज्ञानिकों ने भाग लिया।

राष्ट्रीय किसान विज्ञान कांग्रेस के नतीजे : तीन दिवसीय तीन दिनों के मंथन में यह बात आयी कि किसान एवं वैज्ञानिकों के शोध को समन्वित करने की आवश्यकता है। छात्रों में रचनात्मक सोच को बढ़ाने के लिए आवश्यक है कि उन्हें शुरू से इनोवेशन की जानकारी दी जाए। नवाचारी किसान एजंगक्ट (अनुबंध) प्रोफेसर के रूप में नियुक्त होंगे। किसानों के उद्यम को बढ़ाने के लिए नेटवर्किंग एवं उत्पाद के सही मूल्य प्राप्त कराने के लिए ब्रांडिग एवं एडवर्टाइजिंग की आवश्यकता है। किसानों द्वारा विकसित प्रजातियों का पंजीकरण अधिक हो। इसके लिए पौधा किस्म और कृषक अधिकार संरक्षण प्राधिकरण, नई दिल्ली जागरूकता कार्यक्रम करेगा। नवाचारी किसानों का संघ बनाने का भी निर्णय हुआ है। 

समारोह में कई किसानों के नवाचार आकर्षण के केंद्र रहे। इनमें हरिमन शर्मा (हिमाचल प्रदेश) द्वारा विकसित सेब की प्रजाति एवं अशोक मनवानी (महाराष्ट्र) के मोती की खेती के माॅडल मुख्य थे। 

समापन समारोह में कृषि वैज्ञानिक डाॅ आर.के.सोहाने, डाॅ विशाल नाथ, डाॅ डीएन सिंह, डाॅ एसके सिंह, डाॅ पंकज कुमार, डाॅ भीवी पटेल एवं डाॅ हरदेव चैधरी मौजूद थे। एक पुस्तक का भी विमोचन किया गया। 


संबंधित खबरें