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जिंदगी की दूसरी पारी के लिए करें अंगदान-देहदान

पटना । जीते जी रक्तदान एवं मरने के बाद जिंदगी की दूसरी पारी के लिए अंगदान-देहदान जरूर करें। ड्राइविंग लाइसेंस फाॅर्म में अंगदान-देहदान की स्वीकृति के प्रावधान के बाद बिहार में अब तक 9447 लोगों ने सहमति दी है। उक्त बातें डिप्टी सीएम सुशील कुमार मोदी ने कहीं। वह अंतरराष्ट्रीय अंगदान दिवस पर रवींद्र भवन में आयोजित ‘संकल्प महोत्सव ’ को संबोधित कर रहे थे। महोत्सव का आयोजन दघीचि देह दान समिति ने किया था। इस मौके पर नेत्रदान करने वाले 15 परिवार को सम्मानित भी किया गया।

उन्होंने कहा कि नेत्रदान, अंगदान, देहदान से पहले परिवार में चर्चा करें, सोचें और फिर संकल्प लें। भारत में दान की प्राचीन परंपरा रही है। विश्व के पहले चक्षु दानकर्ता भगवान विष्णु रहे हैं। महर्षि दधीचि ने आसुरी शक्तियों के विनाश के लिए अपनी अस्थियां दान कर दी तथा मृत्युशैय्या पर होने के बावजूद दानवीर कर्ण ने सोने की दांत निकाल कर दान करने में संकोच नहीं किया। 

सूबे में अब तक 250 लोगों का क्रोनिया प्रत्यारोपण तथा 3 लोगों ने शरीर अस्पताल को दान किया है। बिहार में 2013 में दघीचि देहदान समिति की स्थापना के बाद नेत्रदान, अंगदान और देहदान के प्रति लोगों में जागरूकता आई है। पीएमसीएच में आई बैंक की शुरुआत के बाद 2 अक्टूबर को राज्य के 7 मेडिकल कॉलेज-अस्पतालों में भी आई बैंक की स्थापना होगी। राज्य के 6 अस्पतालों को किडनी और क्रोनिया प्रत्यारोपण के लिए लाइसेंस दिया गया है। अंगदान-देहदान के लिए मरीज के परिजनों को प्रेरित करने के लिए अस्पतालों में काउंसलर नियुक्त किए जायेंगे। 

संकल्प महोत्सव को मेघालय के राज्यपाल गंगा प्रसाद, विहिप के अंतरराष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे पी नड्डा व अश्विनी चैबे, सूबे के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय व विधायक संजीव चौरसिया ने भी संबोधित किया। मंच संचालन समिति के सचिव विमल जैन ने किया। 
 


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