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गीता के सिद्धांतों को दैनिक जीवन में अपनाएं : स्वामी मुकुंदानंद 

आध्यात्मिक गुरु एवं लेखक स्वामी मुकुंदानंद ने युवाओं को संदेश दिया है कि वे गीता के सिद्धांतों को अपने दैनिक जीवन में अपनाएं। इससे वे तनावमुक्त, सकारात्मक और उद्देश्यपूर्ण जीवन जी सकते हैं। मन का संतुलन ही बेहतर निर्णय क्षमता, आत्मविश्वास और आंतरिक शांति की आधारशिला है।

स्वामी मुकुंदानंद पटना के दशरथ मांझी श्रम एवं नियोजन अध्ययन संस्थान में एक विशेष व्याख्यान को संबोधित कर रहे थे। व्याख्यान का विषय मन प्रबंधन एवं जीवन कौशल था। श्रम संसाधन मंत्री संजय टाइगर भी इस व्याख्यान में मौजूद रहेे। 

स्वामी मुकुंदानंद ने आधुनिक जीवन की भागदौड़, तनाव और असंतुलन पर गहन चर्चा की। उन्होंने कहा कि आज की जीवनशैली में मन का सही प्रबंधन अत्यंत आवश्यक है। भगवद्गीता के सिद्धांत कर्मयोग, अनुशासन और आत्मबोध केवल धार्मिक दर्शन नहीं, बल्कि व्यावहारिक जीवन के प्रभावी सूत्र हैं।

श्रम संसाधन मंत्री ने कहा कि ऐसे व्याख्यान युवा और कर्मचारियों को मानसिक रूप से सशक्त और जीवन कौशल के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इस व्याख्यान से सभी को सकारात्मक सोच और संतुलित जीवन जीने की प्रेरणा मिली है। 
 


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