नई दिल्ली । भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने 16 अगस्त, 2018 की शाम 5ः 05 बजे एम्स नई दिल्ली में अंतिम सांस ली । 94 वर्षीय वाजपेयी 11 जून, 2018 सेे एम्स में भर्ती थे। एम्स की मेडिकल बुलेटिन में बताया गया कि पूर्व प्रधानमंत्री छाती में जकड़न एवं किडनी संक्रमण से पीड़ित थे। पिछले 36 घंटे में तबीयत ज्यादा बिगड़ने के कारण उन्हें लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर रखा गया था।
निधन की खबर फैलते ही पूरे देश में शोक छा गया। देश में सात दिन का राष्ट्रीय शोक घोषित किया गया है । 17 अगस्त को राष्ट्रीय स्मृति स्थल पर वाजपेयीजी का अंतिम संस्कार होगा । राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत सभी नेताओं ने गहरा दुःख जताया है ।
ओजस्वी वक्ता, पत्रकार व प्रखर कवि अटल बिहारी वाजपेयी को देश के शीर्ष नागरिक पुरस्कार भारत रत्न से 2015 में सम्मानित किया जा चुका है। हालांकि एक बार वाजपेयी ने यह सर्वोच्च सम्मान लेने से इनकार कर दिया था। 1998 के परमाणु परीक्षण व 1999 में करगिल युद्ध के बाद वाजपेयी तीसरी बार प्रधानमंत्री बने थे। तब यह विचार हुआ था कि उन्हें भारत रत्न देना चाहिए। अटल बिहारी वाजपेयी को जब यह जानकारी मिली, तो उन्होंने कहा अपनी ही सरकार में खुद को सम्मानित करना उचित नहीं है ।
अटल बिहारी वाजपेयी ने प्रधानमंत्री के रूप में तीन बार देश का नेतृत्व किया। पहली बार 1996 में 16 मई से 1 जून तक, दूसरी बार 19 मार्च 1998 से 26 अप्रैल 1999 तक और तीसरी बार 13 अक्टूबर 1999 से 22 मई 2004 तक देश के प्रधानमंत्री रहे। वह 1968 से 1973 तक जनसंघ के अध्यक्ष भी रहे। उन्होंने लंबे समय तक पाञ्चजन्य, राष्ट्रधर्म, और वीर अर्जुन पत्र-पत्रिकाओं का संपादन भी किया।