नई दिल्ली । भारतीय राजनीति के अजातशत्रु अटल बिहारी वाजपेयी 17 अगस्त की शाम पंचतत्व में विलीन हो गए । राष्ट्रीय स्मृति स्थल पर राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया । उनकी दत्तक पुत्री नमिता कौल भट्टाचार्या ने मुखाग्नि दी। स्मृति स्थल शांति वन और विजय घाट के बीच है। स्थल पर मौजूद गण्यमान्य लोगों ने नम आंखों से उन्हें अंतिम विदाई दी।
अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई, भूटान नरेश जिग्मे खेसर नामग्ये वांगचुक, नेपाल के विदेश मंत्री प्रदीप कुमार गयावली, पाकिस्तान के कानून मंत्री जफर अली शाह एवं बांग्लादेश के विदेश मंत्री अबुल हसन महमूद अली ने राष्ट्रीय स्मृति स्थल पर वाजपेयी जी को श्रद्धांजलि दी।
स्मृति स्थल पर राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, उपराष्ट्रपति, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, पूर्व उपप्रधानमंत्री लाल कृष्ण आडवाणी, केंद्रीय मंत्री, कई राज्यों के राज्यपाल व मुख्यमंत्री, भाजपा व कांग्रेस अध्यक्ष, बिहार के मुख्यमंत्री एवं उपमुख्यमंत्री,कई दलों के वरिष्ठ नेता, सेना प्रमुख एवं वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।
इससे पहले दोपहर एक बजे भाजपा मुख्यालय से अटल बिहारी वाजपेयी जी की अंतिम यात्रा शुरू हुई । उन्हें विदाई देने के लिए मार्ग पर जनसैलाब उमड़ पड़ा । यात्रा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह समेत केंद्रीय मंत्री भाजपा मुख्यालय से पैदल स्मृति स्थल पहुंचे ।