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मक्का के वैल्यूचेन पर सूक्ष्म स्तर पर काम करने की जरूरत

पटना । राष्ट्रीय कृषि समिति, फिक्की के अध्यक्ष टी आर केसवन ने कहा कि देश को 2022 तक 45 मिलियन टन मक्के की आवश्यकता होगी। बिहार इस जरूरत को पूरी करने में एक अहम भूमिका निभा सकता है। इसलिए बिहार में मक्का के वैल्यूचेन पर सूक्ष्म स्तर पर काम करने की जरूरत है। इसमें बागरी संस्थान राज्य सरकार को सहयोग कर सकता है। वह फिक्की एवं बिहार एग्रीकल्चर ग्रोथ एंड रिफाॅर्म इनिसियेटिव (बागरी) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित "Unleashing Maize potential of Bihar" विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे।

कृषि मंत्री : कृषि मंत्री डाॅ प्रेम कुमार ने कहा कि आंध्र प्रदेश और कर्नाटक के बाद बिहार मक्का का तीसरा  बड़ा उत्पादक राज्य है। 2016 में मक्का के सर्वश्रेष्ठ उत्पादन के लिए बिहार को कृषि कर्मण पुरस्कार मिला है। 2017-18 में मक्का की कुल उत्पादकता 39.04 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है, जो राष्ट्रीय औसत 28.89 क्विंटल प्रति हेक्टेयर से अधिक है। हालांकि राज्य में उत्पादित मक्का का 8 फीसदी ही उपयोग होता है।  

डाॅ प्रेम ने कहा कि पूर्णियां, कटिहार, भागलपुर, मधेपुरा, सहरसा, खगड़िया और समस्तीपुर मक्का बेल्ट के रूप में उभरे हैं। इन जिलों में 50 क्विंटल प्रति एकड़ मक्का की उत्पादकता है। यह सर्वश्रेष्ठ मक्का उत्पादक देश अमेरिका से कहीं अधिक है। जलवायु परिवर्तन के कारण मक्का की गुणवत्ता प्रभावित होती है। राज्य सरकार भंडारण की आधारभूत संरचना के विकास के लिए कटिबद्ध है। 

कृषि मंत्री ने कहा कि उम्मीद है कि इस कार्यशाला से बिहार की मक्का मूल्य श्रृंखला को मजबूत करने के लिए सरकार को कुछ महत्वपूर्ण अनुशंसा प्राप्त होगी।

प्रधान सचिव : प्रधान सचिव सुधीर कुमार ने कहा कि बिहार में अब तक 43 मेज प्रोसेसिंग यूनिट की स्थापना हुई है। राज्य में स्वीटकाॅर्न और बेबीकाॅर्न के निर्यात की काफी संभावनाएं हैं। बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर ने सबौर संकर मक्का 1 एवं डीएचएम 117 प्रभेद विकसित किया है। सूखा प्रभावित क्षेत्रों के लिए सबौर संकर मक्का-2 प्रभेद को अधिसूचित करने की प्रक्रिया हो रही है। बिहार में कुक्कुट उद्योग, डेयरी एवं मछली उत्पादन तेजी से बढ़ रहा है। इसलिए मक्का से तैयार प्रोडक्ट एवं रेडी टू यूज पदार्थ जैसे आटा, दलिया, सत्तू, टाॅफी एवं स्नैक्स आधारित उद्योगों में निवेश की संभावना है। 

राष्ट्रीय कृषि समिति, फिक्की के उपाध्यक्ष विजय कुमार, उप महासचिव विनय माथुर, फिक्की के कृषि सलाहकार प्रवेश शर्मा, बागरी के प्रबंधक गुणा नंद शुक्ला, कृषि और उद्योग संस्थानों के प्रतिनिधि एवं कृषि वैज्ञानिकों ने भी अपने विचार रखे।
 


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