पटना । 15 वें वित्त आयोग के अध्यक्ष एन.के. सिंह ने कहा कि बिहार सरकार ने केंद्रीय बजट में विशेष सहायता के लिए महत्वपूर्ण एवं तार्किक सुझाव दिये हैं। इन पर गौर करने की जरूरत है। बिहार के हित में आयोग सहानुभूतिपूर्वक विचार करेगा।
सीएम सचिवालय स्थित संवाद में एन.के. सिंह ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एवं डिप्टी सीएम सुशील कुमार मोदी के साथ बैठक की। वित्त विभाग की प्रधान सचिव सुजाता चतुर्वेदी एवं सचिव वित्त (व्यय) राहुल सिंह ने आयोग के समक्ष विस्तृत प्रस्तुति दी। वित्त आयोग की ओर से सदस्य शक्ति कांत दास, डॉ अनूप सिंह, डॉ अशोक लाहिरी, सचिव अरविंद मेहता एवं संयुक्त सचिव मुखमित सिंह भाटिया, डाॅ. रवि कोटा व आयोग के अन्य प्रतिनिधि शामिल हुए।
मुख्यमंत्री : सीएम ने कहा कि बिहार एक लैंड लॉक्ड स्टेट है। यहां अन्य कोस्टल राज्यों की तरह इंडस्ट्री एवं ट्रेड के लिए इन्वेस्टमेंट नहीं हैै। यह राज्य को स्पेशल कटेगरी मिलने से ही संभव हैै। अन्य राज्यों की तुलना में यहां प्रति व्यक्ति आय कम है, लेकिन यहां व्यक्तिगत काम से लोगों की आमदनी बढ़ी है। यह आंकड़ों में प्रतीत नहीं होता हैै। जो राज्य पिछड़े हैं , वहां संसाधनों की कमी हैै। वहां पर अन्य राज्यों की तरह संसाधन का वितरण उचित नहीं हैै। इस कारण जो राज्य पिछड़े हैं, वह पिछड़ते ही चले जायेंगे। वित्त आयोग उचित आधार पर बिहार के लिए निर्णय करे।
सीएम ने बताया कि 2005 में राज्य का बजट 30 हजार करोड़ का था और आज 1 लाख 80 हजार करोड़ का हो गया हैै। सरकार हर क्षेत्र में काम कर रही है। बिहार आपदा पीड़ित राज्य है। इस मद में केंद्र सरकार 500 करोड़ राशि देती है। इसे बढ़ाने की जरूरत हैै। यहां बाढ़ नेपाल, उत्तराखंड एवं मध्यप्रदेश की नदियों से आती हैं। भूकंप जोन में आने के कारण इसका असर भविष्य में दिख सकता है।
बजट प्रावधान में वन क्षेत्र की भी अहमियत है। बिहार का वन क्षेत्र आज 15 प्रतिशत होे गया है। इसके लिए हरियाली विकास मिशन की स्थापना की गई है। राज्य में हरित आवरण क्षेत्र आनुपातिक दृष्टिकोण से 17 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकता हैै।
डिप्टी सीएम : डिप्टी सीएम ने आयोग को बताया कि 11 वें वित्त आयोग में बिहार की हिस्सेदारी 11.589 प्रतिशत थी, जो 14 वें में घट कर 9.665 प्रतिशत रह गयी। 13 वें वित्त आयोग की तुलना में 14 वें वित्त आयोग से प्राप्त होने वाली राशि में जहां बिहार की राशि मे 136 प्रतिशत की वृद्धि हुई, वहीं केरल जैसे विकसित राज्य को प्राप्त होने वाली राशि में 191 प्रतिशत एवं राष्ट्रीय स्तर पर यह वृद्धि 173 प्रतिशत थी।
डिप्टी सीएम ने कहा कि 14 वें वित्त आयोग ने आपदा प्रबंधन के लिए 2015 से 2020 के लिए बिहार को मात्र 2591 करोड़ रुपये दिया है, जबकि महाराष्ट्र को 8195 करोड़, राजस्थान को 6094 करोड़ और मध्य प्रदेश को 4848 करोड़ मिला। बिहार ने 2013-18 के बीच आपदा प्रबंधन पर अपने खजाने से 3796 करोड़ रुपये खर्च किया है।
मुख्य सचिव दीपक कुमार समेत संबंधित विभागों के प्रधान सचिव-सचिव व अन्य वरीय पदाधिकारी भी बैठक में मौजूद थे।