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पटना यूनिवर्सिटी में बनेगा नेशनल डाॅल्फिन रिसर्च सेंटर

पटना । नेशनल डाॅल्फिन रिसर्च सेंटर का निर्माण 28 करोड़ की लागत से पटना विश्वविद्यालय परिसर में होगा। मुख्यमंत्री इसका शीघ्र शिलान्यास करेंगे। उक्त जानकारी डिप्टी सीएम सुशील कुमार मोदी ने दी। वह राष्ट्रीय डाॅल्फिन दिवस पर संजय गाँधी जैविक उद्यान में एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। 

चौसा-साहेबगंज तक होगा सर्वे : डाॅल्फिन की आबादी एवं उपलब्धता की जानकारी के लिए चौसा से साहेबगंज तक सर्वे होगा। 42.72 लाख की लागत से तीन संस्थान 15 नवंबर से 15 दिसंबर, 2018 के बीच इस काम को करेंगे। 

मुंगेर में बन रहा आॅब्जरबेटरी :  मुंगेर में एक आॅब्जरबेटरी का निर्माण हो रहा है, जहां से डाॅल्फिन को देखा जा सकता है। गंगा में जाकर डाॅल्फिन देखने की व्यवस्था शीघ्र होगी। 10 लाख की लागत से डाॅल्फिन पर फिल्म भी बन रहा है। डाॅल्फिन बचाने वाले लोगों को पुरस्कृत करने के लिए डाॅल्फिन प्रतिरक्षण-सह-प्रोत्साहन कार्यक्रम भी चल रहा है। डिप्टी सीएम ने लोगों से डाॅल्फिन बचाने की अपील की। 

बाल्मीकी टाइगर रिजर्व : बाल्मीकी टाइगर रिजर्व विकास पर प्रतिवर्ष लगभग 15 करोड़ राशि खर्च हो रही है। 2007 में वहां 8-10 बाघ थे, जो 2018 में बढ़कर 35 से अधिक हो गये हैं। टूरिस्ट के लिए सुविधाएं उपलब्ध करा दी गई हैं। बिहार में प्राकृतिक वनों का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा वन्य प्राणी स्थल के रूप में संरक्षित है।

मोदी ने कहा कि बक्सर जिला में स्थानीय लोगों के सहयोग से कृष्ण मृग का संरक्षण हो रहा है। भागलपुर के गंगा दियारा क्षेत्र में गरूड़ पक्षी के संरक्षण के लिए 10.75 लाख तथा नवादा, गया एवं जमुई जिलों में भालू व चीतल आदि वन्य प्राणियों के संरक्षण के लिए 88 लाख की योजना स्वीकृत की गई है। गरूड़ के संरक्षण से इनकी संख्या में 200 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

5 करोड़ की लागत से भीम बांध में पर्यटकीय सुविधाओं का विकास हो रहा है, जहां गर्म पानी के कुंड का आंनद लिया जा सकता है।
 


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