पटना। भागलपुर कतरनी चावल की खासियत को देखते हुए राज्य सरकार ने इसके और विकास का निर्णय लिया है। इसके लिए बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर को राशि उपलब्ध करा दी गई है। राशि का उपयोग चावल बीज की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए अनुसंधान व प्रचार-प्रसार के लिए बीज किट के वितरण में होगा। कृषि वैज्ञानिक किसानों को बीज उत्पादन, प्रसंस्करण एवं मार्केटिंग का प्रशिक्षण देंगे।
कतरनी चावल की प्रोसेसिंग और मिलिंग से संबंधित व्यवसायी एवं किसानों को राज्य से बाहर विशेष कर बासमती उत्पादक समूह तथा प्रसंस्करण इकाईयों का परिभ्रमण कराया जायेगा। कृषि मंत्री डाॅ प्रेम कुमार ने बताया कि क्षेत्र एवं जिला स्तर पर सबसे अधिक कतरनी धान उत्पादन करने वाले किसान पुरस्कृत किये जायेंगे। बिहार कृषि विश्वविद्यालय सफल किसानों के सफलता की कहानी की वीडियोग्राफी करा कर किसानों के बीच प्रचार-प्रसार करेगा।
हाल में बिहार के विशेष उत्पाद कतरनी धान, जर्दालू आम एवं मगही पान को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली है। तीनों उत्पादों को भारतीय बौद्धिक संपदा के रूप में पंजीकृत एवं भौगोलिक परिदर्शन में शामिल किया गया है। ऐसा राज्य के किसान एवं बिहार कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों के प्रयास से संभव हुआ है।