पटना । आईपीसीसी की रिपोर्ट के अनुसार ग्लोबल वार्मिंग से बिहार व उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में बारिश 20 प्रतिशत तक कम हो जायेगी। गंगा घाटी से जुड़े इलाके पहले से ही कम बारिश से जूझ रहे हैं । अगर ग्लोबल वार्मिंग से डेढ़ डिग्री सेल्सियस तक तापमान बढ़ता है, तो गेहूं उत्पादन में 6 प्रतिशत, चावल में 3.2, मक्का में 7.4 प्रतिशत तक की कमी आयेगी । इसका सबसे अधिक प्रभाव गरीबों पर पड़ेगा । उक्त बातें डिप्टी सीएम सुशील कुमार मोदी ने कहीं। वह वर्ल्ड वाइल्ड फंड (डब्ल्यूडब्ल्यूएफ) की कार्यशाला में नेपाल, झारखंड, पश्चिम बंगाल व यूपी से आए प्रतिनिधियों को संबोधित कर रहे थे।
मोदी ने कहा कि 1850 से 1900 ई. के बीच हुई दूसरी औद्योगिक क्रांति के बाद अभी तक तापमान में 1 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि हो चुकी है । पेरिस समझौते में दुनिया के दशों ने यह निर्णय लिया है कि तापमान वृद्धि को 2 डिग्री तक सीमित रखा जायेगा। 2040 तक यथासंभव 1.5 डिग्री सेल्सियस तक रखने का प्रयास किया जायेगा। ग्रीन हाउस उत्सर्जन को 2010 के स्तर से 2030 तक 50 प्रतिशत तथा 2050 तक शून्य प्रतिशत पर लाने की चुनौती है।
ग्लोबल वार्मिंग से हो रहे जलवायु परिवर्तन से खाद्य सुरक्षा, जलापूर्ति व स्वास्थ्य बुरी तरह प्रभावित होंगे। जीव विशेषज्ञों से उन्होंने अपील की है कि वे जलवायु परिवर्तन का वन्य जीवन पर क्या असर होगा । इसका अध्ययन करें । इस मौके पर प्रधान सचिव त्रिपुरारी शरण समेत डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के अधिकारी मौजूद थे ।