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फसल अवशेष संरक्षण व प्रबंधन पर जनवरी में सम्मेलन

पटना। फसल अवशेष के संरक्षण एवं प्रबंधन पर जनवरी, 2019 में पटना में अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन होगा। सम्मेलन में राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर के विशेषज्ञ अपने अनुभव को बताएंगे। राज्य सरकार ने बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर को आयोजन की जिम्मेवारी दी है। विश्वविद्यालय के निदेशक प्रसार शिक्षा डाॅ आर.के. सोहाने ने बताया कि मुख्यमंत्री की सहमति के बाद सम्मेलन की तिथि तय की जाएगी। 

कृषि मंत्री डाॅ प्रेम कुमार ने बताया कि फसल अवशेष जलाने से मिट्टी की उर्वरा शक्ति कम हो जाती है। बचाव व समाधान के लिए अंतरराष्ट्रीय अनुभव से तकनीकी एवं प्रबंधन कौशल सीखने की जरूरत है। सम्मेलन इस दिशा में मददगार साबित होगा। उन्होंने अन्नदाता से अपील की है कि फसल अवशेष को खेतों में न जलाकर उसे मिट्टी में मिला दें। 

अधिकतर किसान हार्वेस्टर से फसल की कटाई करते हैं, जिससे फसल के तने के अधिकतर भाग खेत में ही रह जाते हैं। धान काटने के बाद रबी फसल लगाने की जल्दबाजी में किसान फसल अवशेष (लार, पुआल व भूसा) को खेतों में ही जला देते हैं। खेत का तापमान बढ़ने से जैविक कार्बन नष्ट हो जाता है। मिट्टी में उपलब्ध सूक्ष्म जीवाणु व केचुएं मर जाते हैं। इनके मिट्टी में रहने से ही मिट्टी जीवंत कहलाती है। नाइट्रोजन की कमी से उत्पादन कम होता है। साथ ही, वायुमंडल में कार्बनडाईआॅक्साइड की मात्रा बढ़ती है। इस कारण वातावरण में प्रदूषण एवं जलवायु परिवर्तन जैसी समस्याएं पैदा हो रही हैं। 
 


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