पोर्ट लुइस / पटना । 2 नवंबर, 1834 को भारत से मॉरीशस आये 36 मजदूरों के पहले जत्थे की स्मृति में 36 घड़ों में उनके नाम लिखकर पौधे लगाए गए हैं। एक भव्य समारोह में माॅरीशस के प्रधानमंत्री प्रवीण जगन्नाथ ने उस कुलीघाट पर माल्यार्पण किया, जहां जहाज से उतरने के बाद 16 सीढ़ियां चढ़ कर गिरमिटिया मजदूरों का पहला जत्था पहुंचा था। बिहार विधानसभा के अध्यक्ष विजय चौधरी, डिप्टी सीएम सुशील कुमार मोदी व प्रतिनिधिमंडल के अन्य सदस्यों ने भी उन्हें नमन किया।
अंग्रेजों ने मजूदरों को पत्थर के नीचे सोना मिलने का झांसा देकर मॉरीशस लाया था। 70 साल में बिहार से साढ़े चार लाख गिरमिटिया मजदूरों को माॅरीशस लाया गया है। संयुक्त राष्ट्र ने माॅरीशस के कुलीघाट को विश्व धरोहर घोषित किया है। अब इसे अप्रवासी घाट कहा जाता है। संग्रहालय में बिहार के मजदूरों के सामान सुरक्षित हैं।
डिप्टी सीएम ने बताया कि माॅरीशस में बसे बिहारी मूल के अप्रवासी भारतीयों ने 184 साल बाद भी भोजपुरी भाषा, पर्व-त्योहार, खान-पान और पहनावे के साथ बिहार से सांस्कृतिक रिश्ता बनाये रखा है। 2 नवंबर 1834 को बिहार से आये पुरखों की याद में माॅरीशस में अप्रवासी दिवस मनाने के लिए सार्वजनिक छुट्टी रहती है। अप्रवासी दिवस समारोह में इस बार बिहार विधानसभा के अध्यक्ष विजय कुमार चौधरी मुख्य अतिथि थे।
12 लाख की आबादी वाले माॅरीशस में 68 फीसदी लोग भारतीय मूल के हैं और उनकी भाषा भोजपुरी है। 1968 में आजादी मिलने के बाद से भोजपुरी भाषी व्यक्ति ही माॅरीशस के प्रधानमंत्री होते रहे हैं। दीवाली, शिवरात्रि और गणेश चतुर्थी यहां के बड़े त्योहारों में हैं। इन अवसरों पर सार्वजनिक छुट्टी रहती है।