पटना/ 22.11.18 । मिथिला पेंटिंग बिहार ही नहीं बल्कि देश की पहचान बन चुकी है । सौराठ (मधुबनी) में जनवरी 2019 में मिथिला चित्रकला संस्थान का निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा । संस्थान में अध्ययन और पेंटिंग की सुविधा एक जगह होने से नई पीढ़ी को इसका लाभ मिलेगा । मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने विद्यापति स्मृति पर्व समारोह 2018 के उद्घाटन के अवसर पर उक्त जानकारी दी। समारोह का आयोजन चेतना समिति ने किया । कार्यक्रम की शुरुआत जय-जय भैरवी असुर भयाविनी.... गीत से हुई ।
दिल्ली में बिहार भवन, बिहार निवास और अब निर्माण होने वाले बिहार सदन में भी मधुबनी पेंटिंग की झलक दिखेगी । बिहटा में बनने वाले एयरपोर्ट टर्मिनल बिल्डिंग में मिथिला पेंटिंग की झलक होगी, तो ऊपरी हिस्सा में नालंदा विश्वविद्यालय का खंडहर दिखेगा ।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मैथिल कोकिल विद्यापति कवि, लेखक के साथ एक समाज सुधारक भी थे । शराबबंदी, बाल विवाह एवं दहेज जैसी कुरीतियों के खिलाफ सरकार अभियान चलाकर विद्यापति के कार्यों को आगे बढ़ा रही है । उन्होंने चेतना समिति से आग्रह किया कि विद्यापति जी के संबंधित विचारों का संग्रह कर उसे प्रकाशित करे । राज्य सरकार उसमें सहायता करेगी । आज से 600 साल पहले विद्यापति जी थे, लेकिन आज भी उनका वही सम्मान है । मिथिला का इतिहास भी काफी गौरवशाली है ।
सीएम ने मिथिला पेंटिंग पर आधारित प्रदर्शनी देखी । साथ ही मैथिली के क्षेत्र में अग्रणी कार्य करने वाले लोगों को सम्मानित किया । उन्होंने बताया कि हाल की जापान यात्रा के दौरान मुझे जानकारी मिली कि जापान में मिथिला पेंटिंग का एक बड़ा सेंटर है । टोक्यो हासेगावा ने पेंटिंग की विस्तृत जानकारी दी । जानकारी मिली कि 1988 में मिथिला चित्रकार गंगा देवी ने मिथिला पेंटिंग के लिए यहां लोगों को प्रेरित किया था ।
समारोह में मंत्री नंद किशोर यादव, मंगल पांडेय व विनोद नारायण झा, योजना परिषद के सदस्य संजय झा, विधान पार्षद विजय कुमार मिश्र व दिलीप कुमार चौधरी ने भी अपने विचार रखे । चेतना समिति के अध्यक्ष विवेकानंद झा, उपाध्यक्ष प्रेमलता मिश्र, सचिव उमेश मिश्रा व सीएम के प्रधान सचिव चंचल कुमार समेत गण्यमान्य मौजूद थे।