पटना/27.11.18 । वायु प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए मोटर वाहन अधिनियम में संशोधन कर 15 साल पुराने वाहनों के परिचालन पर रोक लगाने की जरूरत है। इससे स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा मिलेगा। डिप्टी सीएम सुशील कुमार मोदी ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण आकस्मिक बाढ़, भूकंप व वायु प्रदूषण जैसी समस्याएं है। वे बिहार आपदा प्रबंधन प्राधिकार की ओर से आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे।
कार्यशाला का विषय ‘अरबन क्लाइमेट रिजिलियेंस: द कांटेक्स्ट ऑफ रिवर बेसिन’ है। इस मौके पर वायु प्रदूषण पर पटना घोषणा पत्र भी जारी किया गया। प्राधिकार के उपाध्यक्ष श्री व्यासजी, सदस्य डाॅ उदय कांत मिश्र, प्रधान सचिव चैतन्य प्रसाद समेत कई विशेषज्ञों ने भी अपने विचार रखें।
5 जगहों पर लगेगी एयर मॉनीटरिंग मशीन : पटना में वायु प्रदूषण की मॉनीटरिंग के लिए 5 स्थानों पर ‘एयर मॉनीटरिंग मशीन’ लगेगी। ठंड में गंगा में पानी कम होने के कारण गंगा किनारे के शहरों के करीब दियारा क्षेत्र उभर आता है। इससे मिट्टी और बालू के कण उड़ कर वायु को प्रदूषित करते हैं। ईंट-भट्ठा की वजह से वायु प्रदूषण पर रोक के लिए पटना के आस-पास के पांच प्रखंडों में नये ईंट-भट्ठा खोलने पर रोक के साथ पूर्व से संचालित ईंट-भट्ठों को नई स्वच्छता तकनीक अपनाने के लिए एक साल का समय दिया गया है।
भूकंपरोधी भवन निर्माण को बढ़ावा देने की जरूरत : डिप्टी सीएम ने कहा कि भूकंपरोधी भवन निर्माण को बढ़ावा देने की जरूरत है। बिहार के अधिकतर शहर भूकंप जोन 5 में हैं। बिल्डिंग बॉइलॉज में प्रावधान के बावजूद वर्षा जल संचयन को सख्ती से लागू करने की जरूरत है। बिहार के सहरसा, असम के जोरहट एवं पश्चिम बंगाल के बसिरहाट शहरों में बाढ़ के प्रभाव को कैसे कम किया जाए। इस पर गहन विचार की जरूरत है। गंगा किनारों शहरों में जल जमाव बड़ी समस्या है।
कार्यशाला में सहभागी भारत सरकार के राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान व गोरखपुर इन्वॉयरमेंटल एक्शन ग्रुप से कहा गया कि वे समस्याओं के उपाय बताएं। ताकि गंगा बेसिन के किनारे के शहरों को सुरक्षित रखने के साथ अगले 50 साल में होने वाली समस्याओं का समाधान खोजा जा सके।