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कुशल प्रबंधन से बिहार की विकास दर 10 प्रतिशत

पटना/07.12.18 । बिहार की विकास दर राष्ट्रीय औसत (7 प्रतिशत) से अधिक 10.3  है । यह वित्त आयोग एवं एफआरबीएम (फिस्कल रेस्पांसिबिलिटी एंड बजट मैनेजमेंट) के मानकों से संभव हुआ है । बिहार का बजट आकार 2005-06 के 26,328 करोड़ से 7 गुना बढ़ कर 2018-19 में 1 लाख 76 हजार करोड़ हो गया है । उक्त जानकारी डिप्टी सीएम सुशील कुमार मोदी ने दी ।

वे होटल मौर्या में public finance – theory, practice and challenges विषय पर आयोजित दो दिवसीय इंटरनेशनल काॅन्फ्रेंस के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे । आयोजन centre for economic policy and public finance (ceppf), आद्री  ने किया है । सीइपीपीएफ अपनी 10वीं वर्षगांठ मना रहा है।

डिप्टी सीएम ने कहा कि फिस्कल डेफिसिट को 3 फीसदी तक सीमित रखने में सफलता मिली है। स्थापना व्यय में मात्र 4 गुना, जबकि विकास कार्यों के लिए योजना व्यय में 15 एवं राजस्व संग्रह में 7 गुना वृद्धि हुई है । प्रति व्यक्ति आय, साक्षरता, बिजली, स्वास्थ्य सेवा, हवाई यात्रा, खाद्यान्न उत्पादन और कृषि उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। बीपीएल संख्या एवं प्रजनन दर में कमी आई है । 

साक्षरता दर में राष्ट्रीय स्तर पर 9.2 जबकि बिहार में 16.8 प्रतिशत की वृद्वि हुई है । प्रति व्यक्ति आय 2004-05 की 21,174 से बढ़ कर 2016-17 में 38,546 हो गयी हैै । राज्य में शिशु एवं मातृ मृत्यु दर घट कर क्रमश: प्रति एक हजार पर 38 एवं 165 हो गई है। 

14 वें वित्त आयोग के अध्यक्ष एवं पूर्व आरबीआई गवर्नर वाई वी रेड्डी ने fiscal, monetary and regulatory policies पर चर्चा की । उन्होंने अब तक के इकोनाॅमिक रिफॉर्म्स को बताया ।   

इनकी रही उपस्थिति : एस सिद्धार्थ (वित्त विभाग), शैबाल गुप्ता (सीइपीपीएफ), एम गोविंद राव (सीइपीपीएफ), सुखपाल सिंह (आईआईएम अहमदाबाद), एरोल डिसूजा (आईआईएम अहमदाबाद), रोमर कोरिया (मुंबई यूनिवर्सिटी), सुजाता मरजीत (आरबीआई कोलकाता), अंजन मुखर्जी (जेएनयू), अरिंदम दास गुप्ता (गोवा), स्तूति खेमानी (वल्र्ड बैंक), अजय महल (मेलबोर्न यूनिवर्सिटी), सुधांशु कुमार (आईआईएम बोधगया), प्रणय कोतस्थाने (तक्षशिला फाउंडेशन) ।          
 


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