पटना/04.01.2019 । बिजली के मामले में बिहार नीति आयोग की रैंकिंग में देश में छठे स्थान पर है। 2005 में जहां राज्य के मात्र 24 लाख घरों में बिजली कनेक्शन थे, अब वह बढ़ कर 1.39 करोड़ हो गया है। 2005 में बिजली की मांग 700-900 मेगावाट थी, जो अब 5,139 मेगावाट हो गई है। चार दिवसीय इलेक्ट्रिक ट्रेड एक्सपो का शुभारंभ करते हुए डिप्टी सीएम सुशील कुमार मोदी ने यह जानकारी दी।
उन्होंने कहा सूबे के हर गांव तक बिजली पहुंचने से इलेक्ट्रिक गुड्स की बिक्री बढ़ी है। राज्य की बिजली वितरण की क्षमता 10 हजार मेगावाट है। सरकार ने दिसंबर, 2019 तक बिजली के जर्जर तारों को बदलने का निर्णय लिया है। प्री पेड बिजली मीटर लगाने का काम पटना में शुरू हो गया है। अगले दो साल में पूरे राज्य में प्री पेड मीटर लगाने का लक्ष्य है। उपभोक्ता मोबाइल एप से रिचार्ज और पेमेंट कर सकेंगे। इससे बिल जमा करने की परेशानी दूर होगी और लाभ निर्धनों को मिलेगा।
राज्य सरकार बिजली उपभोक्ताओं को अनुदान दे रही है। 2015-16 में 5 हजार करोड़ और 2018-19 में 4 हजार करोड़ से अधिक अनुदान दिए जायेंगे। बिजली चोरी व ट्रांसमिशन लॉस को कम करने की कोशिश जारी है।