पटना/21.01.19। एक समृद्ध देश के लिए राज्यों का विकास होना जरूरी है। मानव शक्ति से संपन्न बिहार की इसमें महत्वपूर्ण भूमिका होगी। डाॅ एपीजे अब्दुल कलाम की उक्त बातों की चर्चा पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने की। वे बिहार उद्योग संघ (बीआईए) के प्लेटिनम जुबली समापन समारोह को संबोधित कर रहे थे। इससे पहले वे 1980 एवं 1991 में भी बीआईए आ चुके हैं।
उन्होंने कहा बिहार ने हाल के दशक में तेजी से विकास किया है। बिहार की विकास दर 10.3 प्रतिशत है जबकि राष्ट्रीय विकास दर 7 प्रतिशत है। विश्व की विकसित अर्थव्यवस्था में शामिल होने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर कई प्रयास करने होंगे। निर्धनता उन्मूलन, रोजगार सृजन व सबके लिए शिक्षा पर विशेष ध्यान देना होगा।
इन कार्यों में बीआईए जैसी संस्थाओं को आगे आना होगा। कारोबार का उद्देश्य मुनाफा के साथ समाज सेवा भी होना चाहिए। बिहार की प्रति व्यक्ति आय 29,190 रुपये (2015-16) है जबकि राष्ट्रीय स्तर पर यह 94,130 रुपये है। इस कारण बिहार के लोगों को बड़े एवं मध्यम उद्योग लगाने में परेशानी हो रही है।
प्रणब मुखर्जी ने बिहार के विकास में land locked एवं बाढ़ को बाधक बताते हुए इसके समाधान के लिए वैज्ञानिकों से अपील की। बांग्लादेश एवं नेपाल से पनबिजली परियोजना पर बात होनी चाहिए। कृषि प्रधान राज्य होने के कारण इससे जुड़े उद्योगों की बड़ी संभावनाएं हैं।
विकास में शहरीकरण की भी भूमिका है। बिहार में शहरीकरण का प्रतिशत मात्र 11.3 है जबकि राष्ट्रीय स्तर पर यह 32 है। इसके लिए केंद्र एवं राज्य स्तर पर कई काम हो रहे हैं। आधारभूत संरचना एवं पर्यटन क्षेत्र कीे मजूबती भी विकास में सहायक होगी।
बीआईए के अध्यक्ष केपीएस केसरी ने भी अपने विचारों को रखा। चार पूर्व अध्यक्षों को भी प्रणब मुखर्जी ने सम्मानित किया।