पटना/ 07.02.19 । मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इंडियन डेयरी एसोसिएशन को बिहार में इस्टर्न जोन का हेडक्वार्टर खोलने का प्रस्ताव दिया। इससे बिहार में डेयरी क्षेत्र की एक्टिविटी के साथ लोगों का आत्मविश्वास भी बढ़ेगा। अभी दूध अत्पादन में बिहार का देश में छठा स्थान है। सरकार का लक्ष्य दूध उत्पादन में टाॅप थ्री है।
एसोसिएशन ने इस्टर्न जोन में दूध उत्पादन में बिहार को अव्वल बताया है। डाॅ वी कूरियन के योगदान से डेयरी क्षेत्र में जो काम शुरु हुआ है। वह इंडियन डेयरी एसोसिएशन के सहयोग से और आगे बढ़ेगा। मुख्यमंत्री बापू सभागार में 47वें डेयरी इंडस्ट्री कॉन्फ्रेंस 2019 के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। इस मौके पर एक सोवेनियर भी जारी किया गया।
सीएम ने कहा ऑर्गेनिक खेती के लिए गाय के गोबर और गोमूत्र की काफी उपयोगिता है। इसके प्रचार-प्रसार के लिए डेयरी एसोसिएशन को काम करना चाहिए। बिहार के 76 फीसदी लोग आजीविका के लिए कृषि पर निर्भर हैं। सरकार की कोशिश है कि किसान खेती के साथ पशु व मत्स्य पालन भी करें, जिससे उनकी आमदनी बढ़े। दिसंबर 2018 तक कॉम्फेड की दूध आपूर्ति 20.46 लाख लीटर प्रतिदिन हो गयी है। मिल्क पाउडर निर्माण के लिए बिहारशरीफ में एक यूनिट है। 22700 दूध सहकारी सोसाइटी से 12 लाख लोग जुड़े हैं, जिनमें ढाई लाख महिलाएं हैं।
डिप्टी सीएम : डिप्टी सीएम सुशील कुमार मोदी ने कहा सुधा डेयरी के बिहार-झारखंड के 21 प्लांट से प्रतिदिन 32 लाख लीटर दूध की प्रोसेसिंग हो रही है। 2016-17 में कॉम्फेड समेत बिहार के दूध उत्पादक संघ ने 3255 करोड़ रुपये का व्यापार किया। इसमें कॉम्फेड का कारोबार 908 करोड़ था एवं 68.33 करोड़ का मुनाफा कमाया ।
पूर्वोत्तर भारत में बिहार दुग्ध उत्पादन में पहले स्थान पर है। राज्य सरकार कॉम्फेड को हर तरह से मदद कर रही है। कॉम्फेड ने 704 करोड़ का ऋण एनसीडीसी से लिया है, जिसका ब्याज राज्य सरकार देगी। अभी डेढ़ करोड़ पशुओं को प्रतिवर्ष टीका दिये जा रहे हैं। साथ ही राज्य में पशु आहार यूनिट भी लग रही है।
पशु पालन व मत्स्य संसाधन मंत्री पशुपति कुमार पारस समेत कई वक्ताओं ने अपने विचार रखे।