पटना/25.02.19 । बिजली शुल्क में कमी नहीं किये जाने पर बिहार इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (बीआईए) एवं बिहार चैंबर ऑफ काॅमर्स ने असंतोष प्रकट किया है। बिहार विद्युत विनियामक आयोग ने 2019-20 के लिए बिजली दर में कोई बदलाव नहीं किया है।
अध्यक्ष के.पी.एस. केशरी ने कहा कि उम्मीद थी कि 2019-20 के लिए निर्धारित बिजली दर में कम से कम 15 प्रतिशत की कमी होगी। आयोग ने 2018-19 के लिए निर्धारित बिजली शुल्क पर ही 2019-20 में भी शुल्क लेने का आदेश दिया है। जबकि राज्य की पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों को वार्षिक राजस्व आवश्यकता से 14.5 प्रतिशत अधिक मुनाफा हो रहा है।
बीआईए के पूर्व उपाध्यक्ष संजय भरतिया ने टैरिफ आदेश को व्यापार आचार नीति के विरुद्ध बताया। दो वित्तीय वर्ष (2017-18 एवं 18-19) में बिहार विद्युत विनियामक आयोग ने बिजली शुल्क में क्रमश: 55 प्रतिशत एवं 15 प्रतिशत वृद्धि की। इसके पीछे तर्क दिया गया कि पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों का घाटा अनुमानित था।
फिलहाल जब कंपनियों को 2019-20 में अपनी आवश्यकता से 2,631.10 करोड़ रुपये अतिरिक्त राजस्व की प्राप्ति हो रही है, तो इस अतिरिक्त लाभ का फायदा उपभोक्ताओं को मिलना चाहिए। बिहार विद्युत विनियामक आयोग का इस ओर ध्यान नहीं देना आश्चर्यजनक है।
बिहार चैंबर ऑफ काॅमर्स एंड इंडस्ट्रीज : बिहार चैंबर ऑफ काॅमर्स के अध्यक्ष पीके अग्रवाल ने कहा पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों कंपनियों का सरप्लस करीब 2500 करोड़ है। इस कारण उम्मीद थी कि बिजली दर में कमी आएगी। इससे न केवल व्यापार एवं उद्योग बल्कि आम उपभोक्ताओं को भी राहत मिलती।
वर्तमान समय में राज्य का औद्योगिकरण एवं आर्थिक विकास बिजली पर निर्भर है। बिजली दर पड़ोसी राज्यों के समतुल्य होने से राज्य का विकास होगा। बिहार विद्युत विनियामक आयोग का बिजली कंपनियों को जारी निर्देश प्रशंसनीय है । निर्देश में एनर्जी एकाउंटिंग, बिजली खरीद में मेरिट ऑर्डर डिस्पैच पद्धति को अपनाने, विपत्रीकरण एवं राजस्व वसूली में दक्षता बढ़ाने, उपभोक्ताओं की शिकायतों का ऑन लाइन निबटारा शामिल है।