पटना/26.02.19। ऊर्जा विभाग की 1006.95 करोड़ रुपये की योजनाओं का उद्घाटन एवं कार्यारंभ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने किया। विद्युत भवन परिसर में आयोजित कार्यक्रम में बेहतर प्रदर्शन करने वाले इंजीनियर एवं पदाधिकारियों को सम्मानित भी किया गया।
समारोह को डिप्टी सीएम सुशील कुमार मोदी, ऊर्जा मंत्री विजेंद्र प्रसाद यादव व प्रधान सचिव प्रत्यय अमृत ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर बिहार विद्युत विनियामक आयोग के अध्यक्ष एसके नेगी, पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों के एमडी समेत वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।
मुख्यमंत्री ने कहा कृषि के विकास के लिए सरकार संकल्पित है। 1312 एग्रीकल्चर फीडर बनाने का लक्ष्य है। जर्जर तारों को 31 दिसंबर 2019 तक बदल दिया जायेगा। स्मार्ट प्री पेड मीटर का काम 15 अगस्त 2020 तक पूरा हो जायेगा। उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े, इसके लिए सरकार लगभग पांच हजार करोड़ रुपये की सब्सिडी दे रही है।
सीएम ने कहा हाइडल और सोलर पावर प्लांट के लिए भी निर्णय लिया गया है। तालाब में नीचे मछली पालन और ऊपर सोलर प्लांट लगाकर बिजली उत्पादन का प्रस्ताव आया है। सरकारी कार्यालयों में भी सोलर प्लांट लगेंगे। कजरा (लखीसराय) और पीरपैंती (भागलपुर) में थर्मल प्लांट की जगह 300-300 मेगावाट के सोलर प्लांट लग रहे हैं। इससे बिजली उत्पादन के साथ पर्यावरण भी सुरक्षित रहेगा।
डिप्टी सीएम : डिप्टी सीएम सुशील कुमार मोदी ने कहा कि 2005-06 से 2019-20 तक लगभग 90 हजार करोड़ रुपये ऊर्जा प्रक्षेत्र पर खर्च किया गया है। 2013 से अब तक 25 हजार करोड़ रुपये उपभोक्ताओं को बिजली अनुदान दिया गया है। बरौनी, कांटी व नवीनगर पावर प्लांट को एनटीपीसी को देने से राज्य सरकार को लगभग 875 करोड़ की बचत हुई है।
घर-घर बिजली पहुंचाने में बिहार देश का आठवां राज्य है। नीति आयोग ने बिजली उपलब्धता में फ्रंट रनर राज्यों में शामिल करते हुए छठे स्थान पर रखा है। तेनुघाट बिजली निगम लिमिटेड विवाद का समाधान हो गया है। स्टेज-2 में उत्पादित 40 प्रतिशत बिजली झारखंड की दर पर बिहार को भी मिलेगी।