सबौर (भागलपुर)/10.05.19। बिहार के जर्दालु आम एवं शाही लीची उत्पादकों का डाटाबेस तैयार होगा। इससे सही उत्पादन क्षेत्र एवं किसानों की वास्तविक जानकारी मिल सकेेगी। बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर (भागलपुर) में कतरनी धान, जर्दालु आम, शाही लीची, मखाना व मगही पान के उत्पादकों से विचार-विमर्श में उक्त बातें आयीं। कार्यशाला का उद्देश्य बिहार की विशेष फसलों से संबंधित किसानों की समस्याओं का निदान खोजना था। एक दिवसीय कार्यशाला की अध्यक्षता कुलपति डाॅ अजय कुमार सिंह ने की।
कतरनी धान का क्षेत्रफल एवं सिंचाई उपलब्धता बढ़ाने पर विशेष चर्चा हुई। जर्दालु आम को सघन बागवानी से हटकर दूरी पर लगाने के लिए सरकार से अनुदान बढ़ाने की बात आयी, जिससे बागों की घेराबंदी हो सके। आम एवं लीची के लिए ड्रिप सिंचाई के साथ बोरिंग के लिए राष्ट्रीय बागवानी मिशन से अनुदान उपलब्ध कराने की भी पेशकश की गई।
मगही पान के किसानों को कम एवं अधिक तापमान में आने वाली समस्याओं का समाधान बताया गया। साथ ही मार्केटिंग कनेक्टिविटी बनाकर किसानों को अधिक मुनाफा दिलाने पर भी बल दिया गया।
जर्दालु आम को बिहार कृषि विश्वविद्यालय के फल प्रौद्योगिकी विभाग के राइपेनिंग चेम्बर में रखकर बाहर भेजने पर विमर्श हुआ। साथ ही किसानों को सलाह दी गई कि वे फूड प्रोडक्शन ऑर्गेनाइजेशन (एफपीओ) बनाकर मार्केटिंग से जुड़े, जिससे उन्हें फसल से अधिक लाभ प्राप्त हो।
कार्यशाला में डाॅ आर.के.सोहाने, डाॅ आई.एस.सोलंकी, डाॅ आर.आर. सिंह, डाॅ अभय मानकर, संयुक्त कृषि निदेशक एस.के. चौधरी एवं मृत्युंजय कुमार समेत किसान, विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक एवं पदाधिकारी मौजूद थे।