सबौर (भागलपुर)/20.05.2019। प्रमंडलीय आयुक्त वंदना किनी ने कहा है कि मौसम में परिवर्तन को देखते हुए वैज्ञानिक तरीके से खेती करना लाभकारी होगा। प्रचलित पद्धति से खेती करने में जोखिम है। कई राज्यों में खेती को लाभकारी बनाने में सहकारी संगठनों ने बड़ी जिम्मेवारी निभाई है। हमें उसका पालन करना चाहिए। वे बिहार कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू) में क्लाईमेट स्मार्ट विलेज परियोजना से जुड़े किसानों के क्षमता संवर्द्धन विषय पर आयोजित कार्यशाला को संबोधित कर रही थीं।
उन्होंने कहा जलवायु परिवर्तन के कारण आने वाले समय में पानी की कमी होेगी। उसके समाधान के लिए हमें साधन संरक्षण तकनीक का व्यवहार खेती में अनिवार्य बनाना होगा। खेती में नवाचार इसे लाभदायक बनाने का एक विकल्प है। राजस्थान के किसानों ने ग्वारफली को औद्योगिक क्षेत्र का कच्चा माल बनाकर अपनी आमदनी कई गुना बढ़ा ली है।
कुलपति डाॅ अजय कुमार सिंह ने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को जीवन पद्धति का अंग बनाना होगा। प्रायः देखा जाता है कि किसान सरकारी योजनाओं का लाभ बंद होने के साथ कृषि की उन्नत तकनीक का प्रयोग भी बंद कर देते हैं। क्लाईमेट स्मार्ट विलेज परियोजना का मुख्य उद्देश्य यांत्रिक खेती को बढ़ावा देकर प्राकृतिक संसाधनों का प्रबंधन एवं संरक्षण करना है।
चयनित 8 जिलों में 4 काॅरिडोर : राज्य सरकार ने 2018 में मौसम परिवर्तन के परिपेक्ष्य में यांत्रिक खेती को बढ़ावा देने के लिए चयनित 8 जिलों में 4 काॅरिडोर (पटना-बिहारशरीफ, समस्तीपुर-दरभंगा, मुंगेर-भागलपुर एवं पूर्णिया-कटिहार) के माध्यम से क्लाईमेट स्मार्ट विलेज परियोजना शुरू की है। मुंगेर-भागलपुर काॅरिडोर योजना के क्रियान्वयन की जिम्मेवारी बिहार कृषि विश्वविद्यालय को मिली है।
इस मौके पर बीएयू के रजिस्ट्रार डाॅ एम. हक, निदेशक डाॅ आर.के. सोहाने, डाॅ आर. एन. सिंह, डाॅ आर.आर.सिंह, डाॅ अरुण कुमार, अशोक कुमार सुमन, डाॅ पी. के. सिंह, डाॅ राजेश कुमार, प्राचार्य डाॅ आर. पी. शर्मा, संयुक्त कृषि निदेशक एस. के. चौधरी समेत बड़ी संख्या में किसान मौजूद थे।