पटना/19.06.19। राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति की 68 वीं त्रैमासिक बैठक डिप्टी सीएम सुशील कुमार मोदी की अध्यक्षता में हुई। बैठक के बाद उन्होंने बताया कि 2007-08 में जहां मात्र 10,762 करोड़ रुपये ऋण बांटे गए थे, वहीं 2018-19 में 10 गुना ज्यादा 1,09,582 करोड़ का लोन बैंकों ने दिया है। यह तय लक्ष्य 1,30,000 करोड़ का 84.29 प्रतिशत है।
पिछले 10 वर्षों में साख-जमा अनुपात में भी 10 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। चालू वित्त वर्ष 2019-20 के लिए 1 लाख 45 हजार करोड़ की वार्षिक साख योजना तय की गई है। लक्ष्य का 90 फीसदी से अधिक हासिल करने का बैंकों को निर्देश है।
बैंकों को सुविधा बढ़ाने का निर्देश : डिप्टी सीएम ने बैंकों को किसानों को अधिक केसीसी देने, ऋण के लिए आवेदन व स्वीकृति की ऑनलाइन सुविधा देने, बैंकिंग सुविधा से वंचित 160 ग्रामीण केंद्रों में बैंक आउटलेट खोलने, शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में एटीएम की संख्या बढ़ाने एवं साइबर फ्रॉड की रोकथाम के कारगर उपाय का निर्देश दिया।
डेयरी एवं मछली पालकों को भी केसीसी सुविधा : केसीसी के तहत भारत सरकार के बिना मॉरगेज 1 लाख से बढ़ा कर 1 लाख 60 हजार तक ऋण देने का निर्देश है। इस वित्तीय वर्ष से डेयरी, फिशरी और पॉल्ट्री किसानों को भी केसीसी सुविधा का लाभ मिलेगा। केंद्र सरकार के ऑनलाइन ‘59 मिनट में 1 करोड़ ऋण स्वीकृति योजना’ के तहत बिहार में 867 लोगों को 242 करोड़ का ऋण दिया गया है।
बिहार में 15 हजार करोड़ का एनपीए : 31 मार्च, 2019 तक बिहार में बैंकों का 15 हजार करोड़ एनपीए है। यह कुल कर्ज का करीब 11 प्रतिशत है। जीविका के स्वयं सहायता समूह से जुड़ी गरीब दीदी की कर्ज वापसी की दर 98 फीसदी है। बैंकों को एनपीए कम करने के लिए कर्ज वूसली का समुचित तंत्र विकिसत करने का निर्देश मिला है। किसान भी समय पर ऋण वापस कर राज्य सरकार के एक और केंद्र सरकार के तीन प्रतिशत ब्याज अनुदान का लाभ उठाएं।