पटना/02.07.19। कतरनी चावल के विकास के लिए कृषि विभाग ने 3.73 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी है। राशि बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर को दी जायेगी। साथ ही पोषक अनाजों के उत्पाद एवं विकास में अवरोध तकनीक का प्रयोग करने के लिए अतिरिक्त 50 लाख राशि मिलेगी। राशि राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के रफ्तार के अंतर्गत दी जा रही है।
कृषि मंत्री डाॅ प्रेम कुमार ने बताया कि कार्यक्रम का उद्देश्य कतरनी धान का गुणवत्तायुक्त बीज उत्पादन, कतरनी के जैविक खेती एवं प्रबंधन का मानकीकरण, कतरनी में सुगंध के विकास में भूमि और जलवायु की भूमिका की जांच और इसका ब्रांडिंग करना है।
कतरनी चावल के जीआई टैग को पाने में बिहार कृषि विश्वविद्यालय ने तकनीकी सुविधा प्रदान की है। कार्यक्रम के तहत विभिन्न प्रशिक्षण, एक्सपोजर विजिट, किसान चैपाल एवं वीडियो फिल्म के माध्यम से चावल के लिए बाजार, ब्रांडिंग और विस्तार के लिए कार्य किये जायेंगे। कतरनी धान के व्यावसायीकरण में नकली या जालसाजी की जांच के लिए डीएनए फिंगर प्रिंट की मदद ली जाएगी। चावल की अच्छी कीमत पाने में जीआई टैग मददगर होगा।